संवाद दाता:- सलीम जावेद
वाराणसी। पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को कैम्प कार्यालय में आयोजित साइबर क्राइम समीक्षा गोष्ठी में साइबर अपराध की रोकथाम और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तौर-तरीकों को देखते हुए बनारस की पुलिसिंग में भी समयानुकूल बदलाव जरूरी है।
पुलिस आयुक्त ने तकनीकी संसाधनों, साइबर इंटेलिजेंस और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से साइबर अपराधियों तक पहुंचने के साथ-साथ उनके पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल मुख्य आरोपी तक सीमित कार्रवाई न होकर म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने और संचालित करने वाले व्यक्तियों, साइबर ठगी की रकम निकालने वालों, फर्जी सिम जारी करने वालों, फर्जी कॉल सेंटर संचालकों तथा एटीएम के माध्यम से ठगी की रकम निकालने वाले लोगों को भी चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
गोष्ठी में साइबर अपराध से संबंधित प्राप्त शिकायतों, साइबर फ्रॉड के मामलों में की गई कार्रवाई और लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए। समस्त जोन के साइबर प्रभारी प्रत्येक 15 दिन में मामलों की समीक्षा कर प्रगति से उच्चाधिकारियों को अवगत कराएंगे। साथ ही शिकायतों के पंजीकरण, लंबित मामलों में प्रभावी कार्रवाई, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। 
एक वर्ष में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
कमिश्नरेट वाराणसी की साइबर क्राइम पुलिस द्वारा विगत एक वर्ष में संगठित साइबर अपराध के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई हैं। पुलिस के अनुसार इस दौरान 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश करते हुए 277 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ संबंधित धाराओं में विधिक कार्रवाई कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में भी कार्रवाई:
डिजिटल अरेस्ट से जुड़े 5 अभियोगों में पुलिस ने 36 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से संबंधित मामलों में लगभग 1.20 करोड़ रुपये की धनराशि, मोबाइल फोन, चार पहिया वाहन और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।
15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़:
साइबर अपराध के संगठित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विगत एक वर्ष में 15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ कर 175 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। इन नेटवर्कों द्वारा निवेश, विदेशी नागरिकों से ठगी और नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी किए जाने के मामलों में कार्रवाई की गई।
16,982 NCRP शिकायतों का निस्तारण:
साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 16,982 NCRP शिकायतों का निस्तारण किया गया। पुलिस अधिकारियों को लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
25 करोड़ रुपये होल्ड, 4.5 करोड़ की रिकवरी:
साइबर ठगी के मामलों में त्वरित वित्तीय कार्रवाई करते हुए करीब 25 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कराई गई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 4.5 करोड़ रुपये की धनराशि पीड़ितों को वापस कराई गई।
10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 IMEI ब्लॉक:
साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध संसाधनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर ब्लॉक कराए गए। पुलिस के अनुसार इससे साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल संसाधनों के दोबारा दुरुपयोग पर अंकुश लगाने में मदद मिली।
21 अभियुक्तों पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई:
संगठित साइबर अपराध के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से गिरफ्तार अभियुक्तों में से 21 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
550 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू:
साइबर अपराधियों के प्रलोभन और झांसे में आए 550 व्यक्तियों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया। इसके साथ ही साइबर अपराध में प्रयुक्त 17 चार पहिया वाहन बरामद किए गए। पुलिस द्वारा पीड़ितों की सुरक्षा, परिजनों से समन्वय और आवश्यकतानुसार सुरक्षित सुपुर्दगी की कार्रवाई की गई।
25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति किया जागरूक
साइबर अपराध की रोकथाम के लिए कमिश्नरेट पुलिस द्वारा व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया। विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख चौराहों पर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। लोगों को साइबर ठगी के नए तौर-तरीकों, बचाव के उपायों और साइबर हेल्पलाइन से संबंधित जानकारी दी गई।
पुलिस आयुक्त श्री मोहित अग्रवाल ने साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर संबंधित अधिकारियों और पुलिस टीमों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने निर्देश दिया कि साइबर शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, पीड़ितों को तत्काल सहायता, ठगी की धनराशि को समय रहते होल्ड एवं रिकवर कराने के साथ-साथ साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखी जाए।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की रोकथाम में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ आम नागरिकों को जागरूक करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए जन-जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाते हुए नागरिकों को साइबर ठगी से बचाव के प्रति लगातार जागरूक किया जाए।
गोष्ठी में पुलिस उपायुक्त अपराध श्रीमती नीतू, पुलिस उपायुक्त श्री राजेश कुमार पाण्डेय, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध श्री नृपेन्द्र, समस्त जोन साइबर प्रभारी तथा थानों के साइबर नोडल अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।




