UPI फीस पर राजीव कुमार का सुझाव, बोले—कुछ और साल तक जारी रहे जीरो-फीस व्यवस्था

PRESS RELEASE

संवाद दाता:- सलीम जावेद 

नई दिल्ली। UPI लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को सुझाव दिया है कि UPI को कुछ और वर्षों तक बिना फीस के जारी रखा जाना चाहिए।

PTI से बातचीत में राजीव कुमार ने कहा कि सरकार को UPI को एक ‘पब्लिक गुड’ के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार, UPI से मिलने वाले व्यापक आर्थिक और डिजिटल भुगतान संबंधी फायदे, इसे संचालित करने में सरकारी खजाने पर आने वाले करीब 20,000 करोड़ रुपये के खर्च से अधिक महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक Currency-to-GDP Ratio में गिरावट दिखाई देती रहे, तब तक UPI के लिए जीरो-फीस व्यवस्था जारी रखी जा सकती है।

राजीव कुमार ने यह भी कहा कि UPI के अधिकांश लेनदेन छोटी राशि के होते हैं। उनके अनुसार, करीब 96 प्रतिशत लेनदेन 2,000 रुपये से कम के हैं, लेकिन लेनदेन की कुल वैल्यू के लिहाज से लगभग 66 प्रतिशत लेनदेन 2,000 रुपये से अधिक के हैं। उनका तर्क है कि बड़ी राशि वाले लेनदेन पर भी शुल्क लगाने से कुछ उपयोगकर्ता दोबारा नकद भुगतान की ओर रुख कर सकते हैं।

15 अक्टूबर से लागू होना है नया MDR ढांचा

केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2026 को नए UPI MDR ढांचे की घोषणा की थी। इसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, Person-to-Person (P2P) लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार, MDR ग्राहक से वसूल किया जाने वाला शुल्क नहीं है और निर्धारित व्यवस्था में इसे मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के प्रतिभागियों के बीच वितरित किया जाएगा। छोटे कारोबारियों के लिए भी कुछ छूट का प्रावधान रखा गया है। इस बीच UPI की फीस व्यवस्था को लेकर राजीव कुमार के सुझाव ने डिजिटल भुगतान प्रणाली की लागत, भविष्य की स्थिरता और नकद लेनदेन पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।