संवाददाता : जगदीश जोगसन
बालोतरा। भगवान नेमिनाथ एवं राजीमती (राजुल) के पावन प्रेम, विरह, त्याग और वैराग्य की प्रेरणादायी गाथा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 9 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक आयोजित पांच दिवसीय नेम-राजुल कपल शिविर के चतुर्थ दिवस पर विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान नेमिनाथ एवं राजुल के नौ भवों की प्रेमगाथा पर आधारित भावपूर्ण नाटिका रही, जिसने प्रेम की आध्यात्मिक गहराई और त्याग की महत्ता को प्रस्तुत किया। नाटिका के माध्यम से भगवान नेमिनाथ एवं राजुल के नौ भवों में रही प्रीति, प्रेम और विरह की मार्मिक कथा को जीवंत रूप में दर्शाया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि सच्चा प्रेम केवल किसी को प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि त्याग, समर्पण, आत्मिक शुद्धि और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग भी है। कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित शिविरार्थियों को जीवदया, अहिंसा, करुणा, वैराग्य और आध्यात्मिक जागृति जैसे जैन धर्म के मूल सिद्धांतों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई। भगवान नेमिनाथ एवं राजुल की प्रेमगाथा ने यह भाव उजागर किया कि सांसारिक आकर्षण से ऊपर उठकर आत्मकल्याण की राह पर चलना ही जीवन की वास्तविक सार्थकता है। पांच दिवसीय नेम-राजुल कपल शिविर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास, समर्पण और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जा रहा है। शिविर का यह चतुर्थ दिवस प्रेम की पवित्रता के साथ त्याग और वैराग्य के महत्व को समझने का विशेष अवसर बना।




