आखिर किन 3 जाति के जवान ही बन सकते हैं राष्ट्रपति के अंगरक्षक?

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राष्ट्रपति के अंगरक्षक यानी प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) भारतीय सेना की सबसे पुरानी और खास यूनिट में शामिल है. ऐतिहासिक रूप से इसमें सिर्फ 3 समुदायों से सैनिकों की भर्ती की परंपरा रही है. हालांकि, PBG में चयन केवल समुदाय के आधार पर नहीं, बल्कि कठिन मिलिट्री और फिजिकल स्टैंडर्ड्स पर भी होता है।

संवाददाता : सत्यवान सिंह चौहान 

नई दिल्ली। जब भी राष्ट्रपति किसी बड़े राष्ट्रीय समारोह में शामिल होते हैं, उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर सभी की नजर रहती है। गणतंत्र दिवस के बाद होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में भी राष्ट्रपति के साथ खास वर्दी में घुड़सवार जवान नजर आते हैं. ये जवान राष्ट्रपति के अंगरक्षक यानी President’s Bodyguard (PBG) का हिस्सा होते हैं। अपनी शानदार वर्दी, घोड़ों और अनुशासन के कारण PBG की अलग पहचान है।

वहीं, राष्ट्रपति का पद देश के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों में से एक है। इसलिए उनकी सुरक्षा में तैनात जवानों का चयन भी सामान्य तरीके से नहीं होता. PBG भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है। इसे 1773 में तत्कालीन गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स ने बनारस में शुरू किया था. उस समय इसमें 50 घुड़सवार सैनिक थे। बाद में इसकी संख्या बढ़ाई गई। 1950 में भारत के गणराज्य बनने के बाद इस यूनिट का नाम President’s Bodyguard रखा गया।

किन 3 समुदाय के जवान ही बनते हैं राष्ट्रपति के अंगरक्षक?

दरअसल, राष्ट्रपति के अंगरक्षकों में सिर्फ जाट, सिख और राजपूत समुदाय के सैनिकों को ही भर्ती किया जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस रेजिमेंट में इन समुदायों से सैनिकों की भर्ती की परंपरा रही है। हालांकि, PBG में जवानों का चयन विशेष शारीरिक क्षमता, सैन्य योग्यता और कठिन चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। यानी राष्ट्रपति के अंगरक्षक बनना सिर्फ किसी खास समुदाय से आने भर की बात नहीं है. इसके लिए सैनिक को कई कड़े स्टैंडर्ड पर खरा उतरना पड़ता है। यही वजह है कि PBG को भारतीय सेना की चुनिंदा और स्पेशल यूनिट में गिना जाता है।

सिर्फ कद लंबा होना ही काफी नहीं

PBG में शामिल सैनिकों के लिए शारीरिक क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होती है. लंबे कद और मजबूत शरीर वाले सैनिकों को इस भूमिका के लिए उपयुक्त माना जाता रहा है। लेकिन केवल लंबाई के आधार पर किसी सैनिक को राष्ट्रपति का अंगरक्षक नहीं बनाया जाता. चयन प्रक्रिया में उसकी फिटनेस, घुड़सवारी और सैन्य क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आज PBG में विशेष शारीरिक खूबियों वाले जवानों का चयन किया जाता है और इसके लिए कठिन शारीरिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

युद्ध कौशल में भी होते हैं सक्षम

PBG को केवल एक समारोह में हिस्सा लेने वाली यूनिट समझना सही नहीं होगा। इसके जवान घुड़सवारी में माहिर होने के साथ-साथ पैराट्रूपर और आर्मर्ड वॉरियर के रूप में भी ट्रेन्ड होते हैं. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, PBG की भूमिका शांति के समय राष्ट्रपति से जुड़े समारोहों में और जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियानों में भी रही है। यही वजह है कि राष्ट्रपति के अंगरक्षक की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रपति के साथ चलने या परेड में हिस्सा लेने तक सीमित नहीं है। इन सैनिकों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रखा जाता है।

1773 से चली आ रही है गौरवशाली परंपरा

PBG का इतिहास करीब ढाई सदियों पुराना है, 1773 में बनी यह यूनिट पहले Governor-General’s Bodyguard के नाम से जानी जाती थी। बाद में इसे Viceroy’s Bodyguard कहा गया और भारत के गणराज्य बनने के बाद 27 जनवरी 1950 को इसका नाम President’s Bodyguard कर दिया गया।

आज PBG भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है और इसे राष्ट्रपति की अपनी सैन्य यूनिट माना जाता है. इसके जवानों की वर्दी, घुड़सवारी और परेड की शानदार परंपरा इसे सेना की दूसरी यूनिटों से अलग पहचान देती है।