जनपद एटा शहर के बीचों-बीच दिन दहाड़े हुई लूट – लुटेरों ने बे-खोप होकर दो सगी वहनों के स्वर्ण आभूषण लूटे, पुलिस का ढुल मुल रवैया अपराधियों के लिए बना वरदान

CRIME

संकलन कर्ता : सत्यवान सिंह चौहान
एटा। सीसीटीवी कैमरों की जांच पड़ताल के नाम पर पुलिस दरोगा ने लूट की ही शिकार पीड़ित महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुऐ अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने से पहले ही इस लूट की घटना को झूठा साबित करके लुटेरों को क्लीनचिट दे दी,और रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की गई।

दिन दहाडे हुई इस लूट की घटना की रिपोर्ट दर्ज करने पूर्व ही जांच कर्ता अधिकारियों ने अपराधियों को बचाने के इरादे से उनके पक्ष में तमाम उदाहरण प्रस्तुत करना शुरू कर दिये, सच्चाई को नकारते हुए पीड़ित महिलाओं को हडकाकर घटना को सिरे से खारिज करने के नजरिया से मन मांफिक जानकारी इकठ्ठा करना शुरू कर दी। और बाद में प्रार्थना पत्र लेने के उपरांत भी 2 दिन तक थाना में रिपोर्ट दर्ज नही की गई है।

बताते चलें कि विशनपाल सिंह चौहान वरिष्ठ पत्रकार पुत्र श्री स्व0 श्री शंकर सिंह चौहान निवासी बापू नगर शिकोहाबाद रोड एटा की पत्नी श्रीमती रजनी देवी तथा उनकी सगी वहन संगीता देवी दिनांक 22-10 – 2026 को अपने घर बापूनगर से बाजार की ओर पैदल जारही थी तभी शाम 5:15 बजे के करीब तीन अज्ञात लुटेरों ने उन्हें हाजी पुरा मोड से पहले शिव मंदिर के बराबर रोक कर दोनों महिलाओं के गले से सोने के लॉकेट तथा कानों से सोने के कुंडल नोंचते हुए आवाज़ निकलने पर जान से मारने की धमकी से भयभीत करके छीन लिए और अपराधी फरार होगये।

घटना के तुरंत बाद विशनपाल सिंह चौहान पत्रकार पीड़िताओं को साथ लेकर कोतवाली नगर जा पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना बताई तथा मुकदमा दर्ज करने के लिए लिखित तहरीर भी दे दी। लेकिन पुलिस ने घटना को उसी वक्त झूठा साबित करने के लिए 15:20 मिनट तक महिलाओं से उल्टे सीधे प्रश्न करते हुये काफी समय बर्बाद कर दिया। और अपराधियों को दवोचने का कोई प्रयास नहीं किया। यदि उसी वक्त पुलिस चौकसी शुरू कर देती तो अपराधी पकड़े जा सकते थे। रिपोर्ट थोडी देर में लिखवाने का आश्वासन देकर थाना से टरका दिया, बाद में रिपोर्ट भी नही लिखी। अगले दिन दिनांक 23 – 10 – 2026 को पुलिस खण्ड स्नातक के चुनाव में विजी होगई। दिनांक 24 – 10 2026 की शाम को व मुश्किल रिपोर्ट दर्ज होसकी है। जिस तरह से घटना के तुरंत बाद ही पुलिस लूट को झूठा साबित करने में जुट गई,और बाद में रिपोर्ट लिखने में भी काफी हीला हवाली की गई। जिससे साफ जाहिर होता है कि अब घटना की निष्पक्ष जांच होना भी खतरे से खाली नहीं है। पूर्व में ही निर्धारित शासनादेश के सापेक्ष उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ की गाइडलाइन का निर्णय ध्यान केंद्रित करते हुए कहा गया है कि वादकारी का हित सर्वोच्च है बावजूद इसके न जाने किन अज्ञात कारणों से पुलिस मूक दर्शक तो बनी ही है जिसकी आड़ में अपराधी स्वतंत्र होकर अपने घटना को अंजाम देकर निर्भय हो गए हैं।।