स्ट्रीट टू स्टेडियम एकेडमी में जागरूकता का अनोखा संगम, सर्वाइकल कैंसर पर संवेदना तो UPSC पेपर पर छलका दर्द

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आजमगढ़ मंडल ब्यूरो हेड रामनरायन राय उर्फ बबलू राय की खास रिपोर्ट 

“बेटियों की मुस्कान बचानी है, बच्चों के सपनों को उड़ान दिलानी है…”

स्ट्रीट टू स्टेडियम एकेडमी में जागरूकता का अनोखा संगम, सर्वाइकल कैंसर पर संवेदना तो UPSC पेपर पर छलका दर्द

आजमगढ़।

रेलवे स्टेशन स्थित स्ट्रीट टू स्टेडियम एकेडमी रविवार को सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि जागरूकता, संवेदना और उम्मीदों का मंच बन गया।

जहां एक ओर मासूम बच्चों को स्वस्थ भविष्य का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं के टूटते सपनों और बढ़ते मानसिक दबाव की आवाज भी बुलंद हुई।

कार्यक्रम में पहुंचे प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. विपिन यादव और दुर्गा शक्ति सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष पूजा सिंह ने 9 से 14 वर्ष के छात्र-छात्राओं को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया।

बच्चों को बताया गया कि

 

“बीमारी से बड़ी ताकत जागरूकता होती है,

और समय पर लिया गया एक फैसला, पूरी जिंदगी बचा लेता है…”

डॉ. विपिन यादव ने बेहद सहज शब्दों में बच्चों को HPV वैक्सीनेशन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाए तो आने वाली पीढ़ियों को एक बड़ी बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की उत्सुक आंखें, उनके सवाल और सीखने की ललक पूरे माहौल को भावुक बना रही थी। ऐसा लग रहा था मानो छोटी उम्र में ही बच्चे जिंदगी के बड़े सबक सीख रहे हों।

इसी मंच से पूजा सिंह ने हाल ही में संपन्न UPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर भी अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज का युवा दिन-रात मेहनत करता है, सपनों को आंखों में सजाता है, लेकिन जब प्रश्नपत्र जरूरत से ज्यादा कठिन हो जाते हैं तो कई होनहार बच्चे खुद पर ही सवाल उठाने लगते हैं।

उन्होंने शायराना अंदाज में कहा,

“किताबों में डूबे बच्चों की आंखों में ख्वाब रहते हैं,

मगर मुश्किल सवाल कई बार उन ख्वाबों को बेहिसाब कर देते हैं…”

पूजा सिंह ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का उद्देश्य प्रतिभा को परखना होना चाहिए, न कि छात्रों का मनोबल तोड़ना। उन्होंने लोक सेवा आयोग से अपील करते हुए कहा कि प्रश्नपत्रों का स्तर संतुलित रखा जाए, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं का आत्मविश्वास बना रहे।

उन्होंने कहा,

“इम्तिहान ऐसे हों जो हौसले को उड़ान दें,

न कि बच्चों को उनके ही सपनों से अनजान करें…”

 

कार्यक्रम के अंत में बच्चों और अभिभावकों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया गया।

जागरूकता, संवेदना और प्रेरणा से भरे इस आयोजन ने हर मौजूद शख्स के दिल को छू लिया।