Azamgarh News:जब दर्द की आवाज बनी गुड्डू जमाली की जनसुनवाई, जरूरतमंदों के लिए सहारे का हाथ

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नेशनल खबर 9 के लिए आजमगढ़ मंडल ब्यूरो हेड रामनरायन राय उर्फ बबलू राय

 

जब दर्द की आवाज बनी गुड्डू जमाली की जनसुनवाई, जरूरतमंदों के लिए सहारे का हाथ

 

“जहां दर्द हो, वहां दवा बनकर पहुंच जाना,

किसी की आंख में आंसू हो तो वजह बनकर मुस्कुरा जाना।

सियासत तो बहुत लोग करते हैं, मगर इंसानियत के लिए आगे आ जाना—

यही किसी जनप्रतिनिधि की असली पहचान है।”

आजमगढ़ में मुबारकपुर क्षेत्र के एमएलसी शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली की जनसुनवाई में बुधवार को कुछ ऐसा ही मानवीय चेहरा देखने को मिला। आजमगढ़ स्थित अपने आवास पर आयोजित जनसुनवाई में सैकड़ों लोग अपनी उम्मीदें लेकर पहुंचे। किसी के चेहरे पर बेटे की पढ़ाई की चिंता थी, किसी के सामने इलाज के लिए पैसों का संकट था तो कोई परिवार दो वक्त की रोटी और सिर छिपाने की जगह को लेकर परेशान था।

गरीबी की इन मजबूरियों को सुनकर गुड्डू जमाली ने केवल समस्याएं सुनी ही नहीं, बल्कि कई जरूरतमंदों के लिए मदद का हाथ भी बढ़ाया। जिन परिवारों के बच्चों की फीस आर्थिक तंगी के कारण अटकी थी, उनके लिए सहायता की गई। इलाज के लिए परेशान लोगों को भी आर्थिक सहयोग दिया गया। वहीं भोजन और रहने की समस्या से जूझ रहे जरूरतमंदों की भी मदद की गई।

 

“किसी के घर का चूल्हा जले, किसी के बच्चे की पढ़ाई चले,

किसी बीमार की जिंदगी बचे, किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान खिले।

मदद का हाथ छोटा हो या बड़ा,

मगर वक्त पर बढ़े तो वही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है।”

 

गुड्डू जमाली की जनसुनवाई को उनके समर्थक महज शिकायत सुनने का मंच नहीं, बल्कि गरीब और बेसहारा लोगों के दर्द का दरबार बताते हैं। कहा जाता है कि जरूरतमंदों की मदद का यह सिलसिला आज का नहीं है। वह नियमित रूप से जनसुनवाई के दौरान गरीब, असहाय और आर्थिक रूप से परेशान लोगों की समस्याएं सुनते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार उनके समाधान का प्रयास करते हैं।

क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी पहचान ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में बनी है, जिसके दरवाजे पर पहुंचने के बाद गरीब व्यक्ति अपनी बात कहने में संकोच नहीं करता।

मुबारकपुर से गैर जनपदों तक मदद का सिलसिला

गुड्डू जमाली की मदद का दायरा केवल मुबारकपुर या आजमगढ़ तक सीमित नहीं बताया जाता। जरूरत पड़ने पर वह गैर जनपदों में रहने वाले गरीब और असहाय लोगों की भी सहायता करते हैं। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें “गरीबों का मसीहा” कहकर पुकारते हैं।

 

“मंजिल उन्हीं को मिलती है जो राह में दीप जलाते हैं,

खुद से पहले दूसरों के दर्द को समझ पाते हैं।

कुर्सी और पद तो आते-जाते रहते हैं,

दिल में इंसानियत हो तो लोग उम्रभर याद आते हैं।”

 

मुबारकपुर की सियासत में गुड्डू जमाली का यह मानवीय पक्ष उन्हें अलग पहचान देता है। जनसुनवाई में आने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत यह होती है कि उनकी परेशानी को कोई सुनने वाला है और मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ा होने वाला भी कोई है।

यही वजह है कि जब गरीब की आवाज किसी दरवाजे पर दस्तक देती है, तो गुड्डू जमाली का दरवाजा उसके लिए उम्मीद की दस्तक बन जाता है।