संवाद दाता:- नियाज खान
वाराणसी। यार्न की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के चलते साड़ी एवं कपड़ा उद्योग की लागत लगातार बढ़ रही है। बढ़ती लागत से बुनकर और गिरस्ता वर्ग के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। इसी समस्या को लेकर आज बुनकर-गिरस्ता की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में बुनकर बिरादराना तंजीम की सहमति से बुनकर उद्योग मंडल एवं हिंदू बुनकर कल्याण समिति की ओर से साड़ी एवं कपड़ा कारोबार से जुड़े लोगों से रेट बढ़ाने की अपील की गई।
बैठक में मौजूद बुनकरों और गिरस्ताओं ने सुझाव दिया कि यार्न के बढ़े हुए दाम और उत्पादन लागत को देखते हुए साड़ी एवं कपड़े के वर्तमान बाजार भाव में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए, ताकि बुनकरों को लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
बुनकरों के पलायन पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान बुनकरों के लगातार दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करने के मुद्दे पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। बुनकर प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय रहते सरकार और संबंधित विभागों द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पारंपरिक बुनकरी उद्योग से जुड़े परिवारों की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
बुनकर उद्योग मंडल की ओर से सरकार से प्रमुख रूप से दो मांगों पर विचार करने की अपील की गई—
1. बिजली के फ्लैट रेट को कम किया जाए, ताकि बुनकरों पर बढ़ते बिजली खर्च का बोझ कम हो सके और उन्हें अपना काम जारी रखने में सहूलियत मिले।
2. साड़ी एवं कपड़े के रेट में बढ़ोतरी होने पर बुनकर-गिरस्ता कारीगरों की मजदूरी/रेट में भी उचित बढ़ोतरी की जाए, जिससे उत्पादन से जुड़े कारीगरों को भी बढ़ती महंगाई का लाभ मिल सके।
बैठक में कहा गया कि बुनकर उद्योग केवल एक कारोबार नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए सरकार, व्यापारियों, गिरस्ताओं और बुनकरों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर इस पारंपरिक उद्योग को बचाने की जरूरत है।
बैठक में उपस्थित लोगों ने उम्मीद जताई कि साड़ी एवं कपड़ा के रेट में उचित बढ़ोतरी और बिजली की दरों में राहत मिलने से बुनकरों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा तथा बुनकरों के पलायन को रोकने की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।




