शिक्षक उन्नयन संगोष्ठी में सम्मानित हुईं शिक्षिका शशिकला सिंह। संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा 

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शिक्षक उन्नयन संगोष्ठी में सम्मानित हुईं शिक्षिका शशिकला सिंह।

संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा

रसड़ा (बलिया)। शिक्षक केवल पाठ्य पुस्तकों का ज्ञान देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक, प्रेरणा स्रोत और देश के भविष्य के निर्माता होते हैं। शिक्षक का वास्तविक योगदान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र, आत्मविश्वास और जीवन मूल्यों के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

उक्त बातें मुख्य अतिथि एवं ब्लॉक प्रमुख रसड़ा प्रभाकर राव ने शनिवार को शिक्षा क्षेत्र रसड़ा के अतरसुआं प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह एवं शिक्षक उन्नयन संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रभाकर राव ने प्रमुख समाजसेवी रणधीर सिंह, रमाकांत सिंह, धनंजय सिंह, विवेकानंद पांडेय, हरेंद्र तथा पूनम पांडेय सहित अन्य लोगों के साथ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया।

इस दौरान प्राथमिक विद्यालय अतरसुआं की शिक्षिका शशिकला सिंह के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें अतिथियों एवं शिक्षकों द्वारा अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह और उपहार प्रदान कर भावभीनी विदाई एवं सम्मान दिया गया।

समाजसेवी रणधीर सिंह ने कहा कि शिक्षिका शशिकला सिंह ने अपने उत्कृष्ट कृतित्व और व्यक्तित्व से सभी को प्रभावित किया है। बच्चों के प्रति उनका असीम स्नेह और शिक्षा के प्रति समर्पण आने वाले समय में भी शिक्षकों एवं समाज को प्रेरणा देता रहेगा।

शिक्षक नेता गणेश प्रसाद यादव ने कहा कि शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वह अपने ज्ञान की ज्योति से आजीवन समाज और राष्ट्र को अभिसिंचित करता रहता है।

संगोष्ठी को रिंकू सिंह, रिंकी, प्रमीला, वसुंधरा और रमाकांत सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भृगुनाथ सिंह ने की, जबकि संचालन प्रधानाचार्य अमेरिका सिंह ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।