बाराबंकी: सड़क हादसों में छात्रा, मजदूर व महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई जबकि सात घायल हुए हैं। महिला की शिनाख्त न होने से शव को 72 घंटे के लिए रखवा दिया गया है।बड्डूपुर थाना क्षेत्र के मल्लावां गांव निवासी रामस्वरूप की पुत्री नैंसी उर्फ अंशिका (14) पड़ोस के सीतापुर जिले में स्थित इंटर कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा थी। शुक्रवार सुबह वह साइकिल से खिझना गांव के पास स्थित कोचिंग जा रही थी। बड्डूपुर मार्ग पर भट्टे के पास तेज रफ्तार डंपर ने उसकी साइकिल में टक्कर मार दी। जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।

वहीं, कोठी थाना क्षेत्र में बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे बाराबंकी-हैदरगढ़ मार्ग पर भानमऊ चौराहा के पास बाराबंकी की ओर जा रही ट्रैक्टर-ट्राॅली व बाइक में भिड़ंत हो गई। हादसे में बाइक सवार कोठी थाना क्षेत्र के चियारा गांव निवासी सुनील कुमार शर्मा (38) व ट्रैक्टर से उछलकर गिरे शहर के देवा रोड, गांधीनगर निवासी मजदूर नैनसुख (36) की मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार सुनील बाराबंकी में कॉरपेेंटर का काम करता था जबकि नैनसुख के परिजनों ने बताया कि वह मालगोदाम से दुकानों पर खाद पहुंचाने का काम करता था।
कोठी थाना क्षेत्र में ही भानमऊ के पास शुक्रवार को पिकअप और ऑटो में जोरदार टक्कर हो गई। ऑटो के परखचे उड़ गए। हादसे में इब्राहिमाबाद गांव निवासी ऑटो चालक अभिषेक व उसमें सवार उसका भाई चंद्र प्रकाश, आमदपुर के उमेश कुमार व इनकी पत्नी सीमा देवी जख्मी हो गए।

उधर, मसौली थाना क्षेत्र में बाराबंकी-बहराइच हाईवे पर बृहस्पतिवार रात दो बजे बिरौली गांव के पास तेज रफ्तार वाहन ने 40 वर्षीय महिला को रौंद दिया। पुलिस ने सड़क पर पड़े शव की पहचान कराने की कोशिश की मगर सफलता नहीं मिली। एसएचओ यशकांत सिंह ने बताया कि प्रथमदृष्टया महिला मनोरोगी लग रही है।
वहीं, इसी हाईवे पर शुक्रवार को बिंदौरा के निकट रोडवेज बस असंतुलित होकर पेड़ से टकरा गई। उसमें सवार गोसाईगंज लखनऊ निवासी दीपिका अवस्थी व चंदीपुर मजरे गणेशपुर निवासी प्रदीप कुमार घायल हो गए। टक्कर लगते ही यात्री चीख पड़ेे। गनीमत रही कि बड़ा हादसा नहीं हुआ।

एंबुलेंस को काल की मगर नहीं आई
बड्डूपुर क्षेत्र में छात्रा नैंसी उर्फ अंशिका के घायल होने के बाद परिजनों ने एंबुलेंस को काल की मगर एंबुलेंस नहीं आई तो निजी वाहन से पीएचसी बड्डूपुर पहुंचे। वहां चिकित्सक नहीं मिले। फिर जिला अस्पताल ले जाने की कवायद हुई। दरअसल, हादसे के बाद एक घंटे का समय गोल्डन ऑवर माना जाता है।
पापा का इंतजार करती रह गईं बेटियां
कोठी थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले शहर के गांधीनगर निवासी नैनसुख मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिजनों के अनुसार बृहस्पतिवार देर रात तक वह घर नहीं पहुंचे तो खोजबीन शुरू हुई। शुक्रवार सुबह हादसे का पता लगा। उनकी दो बेटियां पापा का इंतजार करती रह गईं।




