संवाद दाता:-नियाज खान
वाराणसी आज दिनांक 07/11/2025 भारतीय जनता पार्टी की ओर से वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आज दिनांक 07 नवम्बर को प्रातः 10:30 बजे नमो घाट, वाराणसी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण करने के पश्चात शुरू हुआ,
इस अवसर पर काशी के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, संगीतकार, पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता के साथ हजारों की संख्या में स्कूल एवं कॉलेजों के छात्र और छात्राओ, , एन .सी.सी, एन. एस.एस के कैडेटो के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं वेदपाठी छात्र एक ही रंग के परिधान में सहभागिता कर देशभक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे।
गंगा तट पर हजारों की संख्या में लोग हाथ में तिरंगा लिए एक साथ बंदे मातरम के गान का स्वर मानो बाबा विश्वनाथ की नगरी से हमारी राष्ट्रीय एकता का विश्व को संकेत दे रहा था,
इसी क्रम में सैकड़ो वेदपाठी छात्रों द्वारा भारतीय परिधान में एक साथ शंख बजाकर भारतीय संस्कृति का अहसास कराया,जो अत्यंत रोमांचकारी क्षण रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने उद्बोधन में कहा हम लोग आज वंदे मातरम गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर यहां एकत्रित हुए हैं, वंदे मातरम गीत भारत के सामूहिक चेतना का प्रतीक है, यह 100 शब्दों का गीत जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने आज ही के दिन 7 नवंबर1875 को लिखा था, और उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ में जीसको स्थान दिया गया इस गीत को सबसे पहले नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने 1896 में इसका गायन किया उसके बाद हमारे आजादी के दीवाने जो आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे उन्होंने इस गीत को आत्मसात करके पूरे देश की भावना को जागृत करने का कार्य किया और बाद में यह गीत हमारे देश का राष्ट्रीय गीत बना आज यह केवल एक गीत नहीं है बल्कि एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति है जो धर्म और देश प्रेम को एक सूत्र में बांधता है स्वतंत्र भारत के निर्माता ने भी इस गीत को राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक माना जो आज प्रत्येक भारतीय के लिए श्रद्धा और गर्व का विषय है सनातन चेतना का जीवंत रूप है कुछ लोग सांप्रदायिक का कर इसको स्वीकृत करने का प्रयास करते हैं या किसी धर्म या संप्रदाय का गीत नहीं है यह संपूर्ण भारत की आत्मा का स्वर है यह मात्र भूमि की वंदना है यही कारण है कि सन 1950 में संविधान सभा ने इस गीत को राष्ट्रीय गीत की मान्यता दी प्रधानमंत्री मोदी जी के शब्दों में वंदे मातरम के गीत में समस्त देशवासियों ने हमेशा राष्ट्र प्रेम के उफान को महसूस किया है, आज हम अपने युवा पीढ़ी को बताना चाहते हैं कि इस गीत के माध्यम से आजादी के दीवाने किस प्रकार अंग्रेजों से लड़ाई लड़े थे, क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल ने अपने उद्बोधन में वंदे मातरम गीत की वर्तमान समय में प्रासंगिकता के बारे में बताया , कार्यक्रम में प्रमुख गणमान्य लोगों में महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, प्रदेश मंत्री रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी, एमएलसी अश्वनी त्यागी,जगदीश पटेल, हंसराज विश्वकर्मा, अरुण पाठक,धर्मेंद्र राय, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, डॉक्टर नीलकंठ तिवारी,त्रिभुवन राम, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या,प्रदेश मंत्री मीना चौबे, कोषाध्यक्ष मनीष कपूर ,विद्यासागर राय,चंद्रशेखर उपाध्याय, राहुल सिंह, जगदीश त्रिपाठी,मधुकर चित्रांश, पंकज चतुर्वेदी, इंजीनियर अशोक यादव ,पूर्व महानगर अध्यक्ष प्रेम कपूर, साधना वेदांती, बबलू सेठ, रनंजय सिंह, आत्मा विश्वेश्वर, कुंवर कांत सिंह, रचना अग्रवाल, शैलेंद्र सिंह ,अनिल गुप्ता, अनुराग शर्मा, अशोक जाटव ,विवेक पाण्डेय, मधुप सिंह अवधेश राय,अशोक पाण्डेय,प्रमील पाण्डेय, राहुल श्रीवास्तव, तबस्सुम ,सारिका, रिया,अजीता,समर्थ सिंह,कृतिका,आदि रहे,




