संवाद दाता अजीत मोदनवाल
साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन दिल्ली, भारत एवं आई गुस्ती बागुस सुग्रीव हिन्दू नेगेरी यूनिवर्सिटी,बाली, इंडोनेशिया के संयुक्त तत्वाधान में 14 और 15 जून 2024 को“सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन में राम” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का सुंदर आयोजन हुआ।कार्यक्रम का प्रारंभ भारत एवं इंडोनेशिया के राष्ट्रीय गीतों के साथ हुआ lतत्पश्चात सुग्रीव यूनिवर्सिटी की छात्राओं द्वारा मनोरम सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया l प्रो. एन.शांति कोकिला,डॉ इंदुमती एस,प्रो.मधुबाला मीना,डॉ.सुनीता मीना ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कीl कर्नाटक राज्य,मैसूर नगर की,9 वर्षीय बालिका कुमारी यालिनी कृशा ने भारतीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक ‘भरतनाट्यम’ नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया । यूनिवर्सिटी के रेक्टर, प्रो. डॉ. डीआरएस,आई जीएसटी, एनजीआर सुदिअना, एम. एसआई,द्वारा सभी महानुभावों का स्वागत, सत्कार किया गया l
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ जोगेंद्रसिंह बिसेन,पूर्व कुलगुरू यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विद्यापीठ नासिक (महाराष्ट्र) द्वारा की गई।संगोष्ठी के मुख्य आतिथ्य पद पर पद्मश्री से सम्मानित प्रो.डॉ आई वायन डिबिया, एसएसटी,एमए,बाली, इंडोनेशिया शोभायमान रहे।प्रो.डिबिया ने कहा कि राम भारत एवं इंडोनेशिया को सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं, राम का आदर्श हमारे जीवन के लिए अनुकरणीय है। इंडोनेशिया के लोग राम को अपना आदर्श मानते हैं और उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार से उनका गहरा सम्बन्ध है ।हनुमान का चरित्र उन्हें बहुत प्रभावित करता है lउन्होंंने इंडोनेशिया के ब्रांड एंबेसडर के रूप में पूरी दुनिया में सांस्कृतिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए हनुमान की एक्टिंग की है lउन्होंने हनुमान का अभिनय करके भी दिखायाl
संगोष्ठी में सुग्रीव विश्वविद्यालय के आचार्य शिक्षकों एवं शोधार्थियों के साथ-साथ भारत के विभिन्न प्रांतो से पधारे लोगों ने अपनी सहभागिता दी lकार्यक्रम में सार्जेण्ट अभिमन्यु पांडेय ‘ मन्नू’ , डा विपिन यादव प्रो. मधुबाला,प्रो.इशरत जहां, डॉ.ओमकार,डॉ यादवेंदु ,डा ध्रुव कुमार,डॉ.जवाहर सिंह गंगवार डॉ.नीरज नैथानी एवं नीतू कुमारी की पुस्तकों का विमोचन/ लोकार्पण किया गया। मंच का संचालन डॉ ध्रुव कुमार ने किया।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में प्रो.इशरत जहाँ ने बीज व्यक्तव्य के रूप में भूमिका निभाई lइंडोनेशिया के रासा आचार्य डॉ आई मेड डरमायासा एम.ए. एवं मॉरिशस से पधारे हुए प्रो. ज्ञान धुनुकचंद ने भारतीय संस्कृति पर वक्ता के रूप में अपना व्याख्यान दिया l
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता डॉ.आईडीए आयु ट्रे पुष्पा,एस.एजी, एम.पार. इंडोनेशिया ने हिन्दू संस्कृति पर व्याख्यान दिया l वक्ता के रूप में डॉ इंदुमती एस.ने भारतीय संस्कृति में राम का विस्तृत वर्णन किया, डॉ.बी.निर्मला ने राम के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया।सत्र की अध्यक्षता डॉ आई गुस्ती नुगरह अगुंग विजया महारडीका ने की l द्वितीय सत्र के मंच का संचालन डॉ. सुनीता मीना ने किया।
द्वितीय दिवस संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो.एन.शांति कोकिला ने की lसत्र के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. आई मेड अरसा विगुना, एसएसटी.पार ने भारत की समृद्ध संस्कृति पर अपने विचार रखे। वक्ता नी कोमंग अरि बुदिअनी ने इंडोनेशिया में राम के स्वरुप पर अपने विचार रखे।डॉ.नवजोत भनोट ने विश्व कल्याण में रामचरित मानस की अहम् भूमिका पर व्याख्यान दिया, प्रो मंजू रानी ने राम की महत्ता को बताया ,एवं प्रो. मधुबाला मीना ने संस्कृत श्लोको के माध्यम से श्री राम की स्तुति कर अपने विचार रखे। सार्जेण्ट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ ने भारतीय संस्कृति और रामचरित मानस पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत के विभिन्न राज्यों से पधारे साहित्यकारों के तहत डॉ विपिन यादव,डॉ नीरज नैथानी,डॉ जवाहर सिंह गंगवार, प्रो. इशरत जहां,प्रो.मंजु रानी,डॉ मधुबाला मीणा,डॉ सुनीता मीणा,डॉ नवजोत भनोट,डॉ बी निर्मला ‘राजी’,प्रो.शांति कोकिला,डॉ इंदुमति एस, आरती रावत पुंडीर,आचार्य हीरेंद्र गौतम,डॉ सरोज मीणा, डॉ तृप्ति जोशी,डॉ सुनीता देवी,डॉ नीलम,डॉ अनीता गोदरा, दीप्ति राठौर,डॉ राधा वाल्मीकि,डॉ रामकेश मीणा, प्रो.ध्रुव कुमार, प्रो.ओंकार, सार्जेण्ट अभिमन्यु पांडेय ‘मन्नू’,नीतु कुमारी और युवा प्रतिभाओं में प्रियांशु, गोराक्षी,भविका आदि के सारगर्भित प्रपत्रों,वक्तव्यों को सुनने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
द्वितीय दिवस का मंच संचालन डा. हीरेंद्र गौतम ने किया।
साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन के कुशल अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि इस फाउंडेशन का उद्देश्य यह है कि भारतीय साहित्य एवं संस्कृति का विस्तार दुनिया के तमाम देशों में हो।इसी उद्देश्य को केंद्र में रखकर नेपाल, मलेशिया,थाइलैंड आदि देशों में आयोजित की गई अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों के जैसे ही इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बाली, इंडोनेशिया में सफलतापूर्वक किया गया है l इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो.मंजू रानी,प्रो.मधु बाला मीना,डॉ हीरेन्द्र गौतम,डॉ जोगेंद्र सिंह बिसेन एवं डॉ इंदुमती एस (5 सदस्यो)को इंडोनेशिया की यूनिवर्सिटी के रेक्टर द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया l
संगोष्ठी के अंत में संपूर्ण कार्यक्रम के सूत्रधार एवं कुशल संयोजक श्री मनोज कुमार एवं श्रीमती कामिनी जी को शाल एवं सम्मान पत्र के द्वारा सम्मानित किया गया और इस सुंदर कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ संपन्न हुआ।
काव्य गोष्ठी: 15 जून की शाम परमधाम आश्रम में आयोजित ग्लूंगन काव्य गोष्ठी अविस्मरणीय रही।आश्रमवासियों द्वारा किया गया आत्मीय स्वागत और काव्य संध्या के तहत् प्रस्तुत किया गया सांस्कृतिक कार्यक्रम लाजवाब था। कवि गोष्ठी में सार्जेेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ ने *पुनः एक बार भारत में प्रभु श्रीराम आए हैं*’ प्रस्तुत किया। माधुरी नथानी ने मां गंगा तथा डा नीतू ने कन्हैया पर कविताएं पढ़ीं। डा शांति कोकिला, डा ओंकार, डा रामकेश, डा अर्चना आदि कवियों/कवियित्रियों द्वारा सुन्दर- सुन्दर कविताएं प्रस्तुत की गईं। कुशल संचालन नीरज नथानी ने किया। परमधाम के महंथ द्वारा सभी कवियों को ग्लूंगन अवार्ड से सम्मानित किया गया। बाली की यह काव्य संध्या उत्तम और यादगार रही।
बाली(इंडोनेशिया) और वियतनाम देश की प्रवासीय यात्रा
बाली और वियतनाम देश की प्रवासीय यात्रा के तो क्या कहने?बाली की प्राकृतिक छटाओं ने तो सबका मन मोह लिया।प्राचीन इमारतों,मंदिरों,नगर की सुंदरता,स्वच्छता हरियाली को देख मन झूम उठा।चारों ओर नारियल और केले के पेड़ देख अपने भारत की याद हो आई।सुंदर कॉफी के बाग,अनेक प्राचीन मंदिर, ज्वालामुखी और सुंदर झरने के दर्शन से मन मुग्ध हो गया।आज भी ये सभी भूले नहीं भुलाए जाते।बाली शहर को देखकर नहीं लगा कि हम विदेश में हैं।वहां की सभ्यता, संस्कृति,भवनों,मंदिरों को देख लगता था जैसे हम अपने ही देश में हैं। शायद हमारा भारत भी कभी ऐसा ही रहा होगा?
‘केचक’ नृत्य(रामलीला) का कार्यक्रम ने तो सिद्ध ही कर दिया कि रामायण कथा,भारत की संस्कृति और सभ्यता कितनी प्राचीन है,वह आज भी शाश्वत और जीवंत है।इंडोनेशिया में यह सब देखकर,हमें अपनी संस्कृति पर और भी अधिक गर्व महसूस होने लगा।यह कथन सत्य है कि हमारा भारत विश्व गुरु है,इसमें कोई संदेह नहीं है । बाली के बाद वियतनाम देश की यात्रा का सौभाग्य भी मिला।हमारी कल्पना का प्राचीन वियतनाम और आज के वियतनाम में जमीन आसमान का अंतर था। वियतनाम युद्ध संग्रहालय को देखकर हम दंग रह गए।भयानक युद्ध के भयानक हालत के बाद,वियतनाम देश ने कितनी तरक्की की, यह सब हमने अपनी इन आंखों ने देखा।विश्वास नहीं हुआ कि यह वही वियतनाम देश है जहां कई वर्षों तक युद्ध होता रहा जिसके बारे में हम सुना और पढ़ा करते थे। उस वियतनाम धरती पर कदम रखने से मन में एक अजीब सी हलचल मची थी। वियतनाम देश ने काफी उन्नति,तरक्की कर ली है, जिसे देखकर हम अचंभित हुए बिना नहीं रह सके।
अंतर्राष्ट्रीय दसवें योग दिवस पर भारतीय साहित्यिक डेलिगेशन द्वारा विदेशी धरती वियतनाम में योग किया गया,जो एक अभूतपूर्व उपलब्धि रही। साहित्य संचय संवाद संस्था द्वारा आयोजित,यह साहित्यिक प्रवासीय यात्रा हमें सदैव याद रहेगी।संस्था के संचालक,अधक्ष आदरणीय मनोज कुमार जी के तो क्या कहने? शुरू से आखरी दिन तक हम सबके सुख दुख के साथी बनकर हमारी सभी सुख- सुविधाओं का उन्होंने बड़ा ख्याल रखा।किसी तरह की असुविधा नहीं होने दी।उनके और उनकी धर्मपत्नी कामिनी जी के सरल शांत,विनम्र स्वभाव के हम सभी दीवाने हो गए। उनके साथ आए दो साथी श्री मनीष जी और श्री रवि कौशिक जी ने पूरी यात्रा का भार अपने कंधों पर उठाए रखा था।रहने की व्यवस्था, शुद्ध शाकाहारी भोजन खाने पीने की व्यवस्था, पर्यटन स्थलों की रूपरेखा, सबकी सुव्यवस्था आदि कर्तव्यों को दोनों ने बखूबी निभाया।मुस्कान और सुदामा दोनों गाइड्स ने भी अपने मधुर व्यवहार से हम सबका दिल जीत लिया। वियतनाम के गाइड वुडी और हैरी ने अपने मधुर व्यवहार और हिंदी फिल्मों के गीत गाकर यात्रा को मनोरंजक बना दिया।फोटोग्राफर प्रियांशु ने सम्पूर्ण साहित्यिक यात्रा को कैमरे में कैद कर अपनी उत्तम फोटोग्राफी का परिचय दिया।इन्हें भी हम सबकी ओर से हार्दिक बधाई। इंडोनेशिया और वियतनाम देश की अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक प्रवासीय यात्रा सदैव याद रहेगी।आदरणीय मनोज जी,कामिनी जी,मनीष जी एवं रवि कौशिक जी को हम सबकी ओर से हार्दिक बधाई।मेरी सुष्मिता और उसकी बेटी यालिनी कृशा का साथ अविस्मरणीय रहेगा।सभी दिग्गज साहित्यकारों से मुलाकात, उनका स्नेह,चिर स्मरणीय रहेगा।सभी को मेरी और से सादर प्रणाम,बधाई और शुभकामनाएं!




