रिपोर्ट- नीरज शुक्ला (रामनगर बाराबंकी संवाददाता)
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बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग आज ‘मौत का हाईवे’ बन चुका है, जहां प्रतिदिन होने वाली भीषण दुर्घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को गम और आक्रोश में डुबो दिया है, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ जाता है और फिर भी संबंधित विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरयू नदी पर बने पुल की मरम्मत का कार्य पिछले दो माह से चल रहा था, इस दौरान वाहनों की गति नियंत्रित रही और आश्चर्यजनक रूप से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई, लेकिन जैसे ही मरम्मत कार्य पूरा हुआ और रिबन काटकर आवागमन सुचारु किया गया, वैसे ही मौतों का सिलसिला पुनः शुरू हो गया, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इस हाईवे पर हो रही दुर्घटनाओं का मुख्य कारण अनियंत्रित गति और विभागीय लापरवाही है।
पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक भी स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है, यहां तक कि मसौली, बिंदौरा, रानीबाजार और कस्बा रामनगर जैसे बड़े-बड़े चौराहे भी घने अंधेरे में डूबे रहते हैं, जिससे रात के समय वाहन चालकों को अनुमान से गाड़ी चलानी पड़ती है और दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
इसके अलावा ‘गति धीमी’, ‘आगे मोड़’, ‘दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र’ जैसे चेतावनी संकेतक बोर्ड भी कहीं दिखाई नहीं देते, जबकि सड़क के दोनों ओर उगी झाड़ियां और जंगल राजमार्ग को और भी खतरनाक बना चुके हैं, मानो यह दो लेन सड़क वर्षों से विभाग की उपेक्षा का शिकार हो।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि इसी जर्जर और असुरक्षित दो लेन राजमार्ग पर वर्षों से टोल वसूला जा रहा है और आये दिन टोल दरों में बढ़ोतरी कर आम राहगीरों की जेबें काटी जा रही हैं, लेकिन बदले में सुरक्षा, रोशनी और यातायात व्यवस्था के नाम पर शून्य दिया जा रहा है।
विभागीय अधिकारी बार-बार केवल यही आश्वासन देते हैं कि जल्द ही इस मार्ग को फोरलेन डिजिटल हाईवे में बदला जाएगा, लेकिन तब तक प्रतिदिन हो रही मौतों का हिसाब कौन देगा, अब तक हजारों जानें जा चुकी हैं और फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्पष्ट है कि यह लापरवाही अब आपराधिक कोटि में आती है और एन.एच.ए.आई. तथा स्थानीय प्रशासन को तत्काल जवाब देना होगा कि आखिर कब तक टोल वसूली के नाम पर लोगों की लाशों पर व्यापार चलता रहेगा।




