संवाददाता : मोनू भारती
मऊ (घोसी टडियाव) । उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। मऊ जिले के घोसी ब्लॉक अंतर्गत टंडियाव में बना 100 बेड का विशाल अस्पताल आज स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उदासीनता के चलते खुद बीमार नजर आ रहा है। करोड़ों की लागत से खड़ी की गई यह आलीशान इमारत आधुनिक सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी के कारण सफेद हाथी साबित हो रही है।
सुविधाओं के नाम पर न अल्ट्रासाउंड न सीटी स्कैन
आस-पास के दर्जनों गांवों की स्वास्थ्य उम्मीदों का केंद्र माना जाने वाला यह अस्पताल बुनियादी जांच सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इतने बड़े अस्पताल में न तो *अल्ट्रासाउंड की कोई व्यवस्था है* और न ही *सीटी स्कैन की सुविधा*। इसके चलते गरीब मरीजों को मामूली जांचों के लिए भी निजी सेंटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।
महिला डॉक्टरों की भारी कमी, भगवान भरोसे प्रसूताएं
अस्पताल की सबसे दयनीय स्थिति महिला स्वास्थ्य विंग की है। अस्पताल में *एक भी गाइनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) डॉक्टर तैनात नहीं है*। इस वजह से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को आपातकालीन स्थिति में मऊ जिला अस्पताल या निजी नर्सिंग होम के लिए रेफर कर दिया जाता है। रास्ते में होने वाली दिक्कतों के कारण कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। क्षेत्र की जनता का आरोप है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान भी इस बड़ी समस्या की तरफ नहीं जा रहा है।
सीएमएस ने कहा: शासन को कई बार लिखा पत्र, फिर भी नहीं मिली गाइनेकोलॉजिस्ट
इस पूरे मामले पर जब अस्पताल के सीएमएस *डॉ. दिनेश चंद्रा* से बात की गई, तो उन्होंने अपनी लाचारी और विभाग के प्रयासों को सामने रखा। सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा ने बताया:
अस्पताल में सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए शासन-प्रशासन को कई बार पत्र लिखकर मांग भेजी जा चुकी है। विशेषकर गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर की तैनाती के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक शासन से किसी भी महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हो सकी है।”स्थानीय सूत्रों की मानें तो सीएमएस डॉ. दिनेश चंद्रा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार अपने स्तर से परिश्रम कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर से बजट और मानव संसाधन (स्टाफ) न मिलने के कारण उनके प्रयास भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश
क्षेत्रीय जनता में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस 100 बेड के अस्पताल की दुर्दशा पर मौन साधे हुए हैं। यदि जल्द ही टंडियाव अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन की मशीनें और महिला डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई, तो स्थानीय ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।




