संवाद दाता:-शमीम हसन
वाराणसी। शहर में ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को आए दिन किराए को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर दूसरे जनपदों और दूसरे प्रांतों से वाराणसी आने वाले यात्रियों से कुछ ऑटो चालक मनमाना किराया वसूलते दिखाई देते हैं। किराए को लेकर चालक और यात्री के बीच कहासुनी और विवाद की स्थिति भी कई बार देखने को मिलती है।
ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के हितों के लिए शहर में विभिन्न यूनियनें लगातार आवाज उठाती रही हैं। यूनियन पदाधिकारी चालकों की समस्याओं, उनके अधिकारों और सुविधाओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि यदि कोई चालक निर्धारित या उचित किराए से अधिक वसूली करता है और यात्रियों के साथ मनमानी करता है, तो ऐसे मामलों में यूनियन और प्रशासन की क्या जिम्मेदारी बनती है?
बाहर से आने वाले यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी
वाराणसी आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक, छात्र और अन्य यात्री स्थानीय किराए की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण कई बार चालक द्वारा बताए गए किराए को मजबूरी में स्वीकार कर लेते हैं। कुछ मामलों में कम दूरी के लिए भी अधिक किराया मांगे जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
किराए की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
प्रशासन को इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए किराया व्यवस्था को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से लागू कराने की आवश्यकता है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, प्रमुख चौराहों और पर्यटन स्थलों पर निर्धारित किराए की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जा सकती है, जिससे यात्रियों को सही किराए की जानकारी मिल सके और विवाद की स्थिति कम हो।
यूनियन की भी बनती है जिम्मेदारी
ऑटो यूनियन के पदाधिकारियों को भी अपने सदस्यों से अपील करनी चाहिए कि यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और किराए के नाम पर किसी प्रकार की मनमानी न करें। यदि किसी चालक के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलती हैं तो यूनियन स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहिए।
प्रशासन करे जांच, नियम तोड़ने वालों पर हो कार्रवाई
पुलिस और परिवहन विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर किराया वसूली और यात्रियों के साथ व्यवहार की जांच कर सकते हैं। हालांकि कार्रवाई निर्धारित नियमों और शिकायत या उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर ही होनी चाहिए, ताकि ईमानदारी से अपना काम करने वाले ऑटो चालकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
वाराणसी देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन नगरी है। ऐसे में यात्रियों के साथ उचित किराया और सम्मानजनक व्यवहार शहर की छवि के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ऑटो चालकों के अधिकारों के साथ यात्रियों के हितों की रक्षा कब सुनिश्चित होगी? क्या प्रशासन मनमाना किराया वसूलने वाले चालकों पर प्रभावी कार्रवाई करेगा?
जरूरत इस बात की है कि चालकों के अधिकारों की रक्षा के साथ यात्रियों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि किराए को लेकर होने वाले विवाद और मनमानी पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जा सके।




