रामनगर बाराबंकी: प्रभारी चिकित्साधिकारी की व्यवस्था निहित कार्यशैली से कर्मचारी और पीडित जन परेशान है।जिसके चलते आधा दर्जन से अधिक स्वास्थ्य कर्मी कार्यो के प्रति लापर वाह है।जिससे शासन की मंशा तार तार हो रही है।प्राप्त जानकारी के अनुसार आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी इनकी व्यवस्था निहित कार्यशैली से आये दिन अस्पताल से गायब रहते है।विभागीय जानकारो का दबी जुबान से कहना था कि इधर कर्मचारी व्यवस्था के तहत गायब रहते है उधर हम लोगो पर कार्य का दबाव अधिक रहता है अधीक्षक हेमंत गुप्ता व्यवस्था के तहत छोटी बडी छुट्टियो से लेकर मन माफिक आने जाने की सुविधा प्रदान करते है।कर्मचारियों को अवकाश देते हैं जिसमें से कुछ कर्मचारियों की सुविधा मासिक हैं।जिसमें अर्चना श्रीवास्तव डाक रुम सहायक एल टी विभा पांडे नीलम सिंह निधि वर्मा प्रियंका यादव सीमा कुमारी दिव्या सिंह व साकेत बाजपेई यह सभी लोग डॉक्टर साहब की मासिक व्यवस्था मे शामिल है।इतना ही नहीं जो मरीज भर्ती किया जाता है उससे भी 50 से ₹100 लिया जाता है और तो और कुत्ता काटने पर जो रेबीज इंजेक्शन सरकार के द्वारा फ्री लगवाया जाता है उसको भी लगाने के लिए ₹100 तक लिए जाते हैं यह सभी पैसा अधीक्षक की जेब में जाता है यहां तक कि अपने चहेतों की ड्यूटी लगाने के लिए अधीक्षक अन्य स्टाफ को डराते धमकाते रहते हैं।किसी ने इसका विरोध किया तो उनका तबादला कराने की धमकी भी देते हैं डॉ हेमंत गुप्ता बाराबंकी जनपद में लगभग 10 12 वर्षों से तैनात है लेकिन अपनी ऊंची पहुंच व पकड़ के बल पर इनका तबादला करने की हिम्मत उच्च अधिकारी भी नहीं कर पा रहे अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर को संज्ञान में लेकर कब तक उक्त अधीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई अधिकारियों के द्वारा की जाएगी या नहीं या तो समय ही बताएगा।




