रिपोर्ट- नीरज शुक्ला (रामनगर बाराबंकी)
रामनगर थाना क्षेत्र के ग्राम कटियारा में सोमवार को युवक जितेंद्र चौहान का शव संदिग्ध परिस्थितियों में कमरे के अंदर फंदे से लटका मिला था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बाराबंकी–बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने स्पष्ट कर दिया कि गिरफ्तारी से पहले अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
सूचना पर प्रभारी निरीक्षक अरुण प्रताप सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। इसी दौरान माहौल बिगड़ गया और पथराव शुरू हो गया। पथराव में प्रभारी निरीक्षक अरुण प्रताप सिंह, कांस्टेबल मानवेंद्र, कांस्टेबल शिवमोहन, महिला हेड कांस्टेबल संगीता, वरिष्ठ उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार तथा फायर ब्रिगेड कर्मी नीरज घायल हो गए। सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर ले जाया गया, जहां से प्रभारी निरीक्षक को गंभीर हालत में जिला अस्पताल, बाराबंकी रेफर किया गया। घटना के दौरान पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया है।
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई। स्थानीय लोगों का दावा है कि हाईवे पर कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, पुलिस पर पथराव होता रहा और सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। इसके बावजूद, उनके अनुसार, जिले के पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर काफी देर बाद पहुंचे। लोगों का कहना है कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब तक स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में आ चुकी थी। इस कारण उनके दौरे को लेकर क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई।
घटना के दौरान वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होती रहीं। इसके बाद स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति बनी हुई थी, तब वरिष्ठ पुलिस नेतृत्व तत्काल मौके पर क्यों नहीं पहुंचा।




