नई दिल्ली
ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन ने इस पूरे प्रकरण में भारत को भी घसीटने की कोशिश की है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में अमेरिका को धमकी देते हुए कहा गया है कि एक-चीन की नीति को भारत समेत सभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन प्राप्त है। भारत ने इस मसले पर आधिकारिक तौर पर अभी को कोई टिप्पणी नहीं की है। परंतु, यह भी सच्चाई है कि भारत ने पिछले लगभग एक दशक से एक चीन की नीति पर भी रणनीतिक चुप्पी साध रखी है।
चीनी विदेश मंत्रालय का यह बयान नई दिल्ली स्थित चीन के दूतावास की तरफ से जारी किया गया है। जानकार चीनी दूतावास की इस सक्रियता को लेकर हैरान हैं। अमेरिकी संसद के निचले सदन की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान पहुंचे के तुरंत बाद से ही चीनी दूतावास बेहद सक्रिय रहा है। चीनी दूतावास ने एक के बाद एक कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी कीं। इनमें ताइवान को चीन का अभिन्न हिस्सा बताया गया है। भारत का जिक्र किया गया है कि किस तरह से उसने एक चीन की नीति को हमेशा से माना है। इसे भारत पर दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है कि वह ताइवान पर कोई टिप्पणी ना कर दे।
अमेरिका और चीन के बीच ताइवान को लेकर उपजे तनाव पर भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक-चीन पर भारत सरकार की तरफ से हाल के वर्षों में न तो समर्थन में और न विरोध में ही कोई टिप्पणी आई है। चीन के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं के बाद जारी होने वाले बयान में भी अब एक चीन की नीति का भारत जिक्र नहीं करता है। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन की सेना की घुसपैठ के बाद भारत पर दबाव है कि वह ताइवान पर अपनी नीति बदले। उस वर्ष पीएम नरेन्द्र मोदी की जन्मतिथि पर ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने बधाई संदेश भेजा था। इस पर चीन ने आपत्ति जताई थी। तब ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा था, ‘भारत व ताइवान मिल कर चीन को बोल रहे हैं कि वह वहां (पूर्वी लद्दाख) से भाग जाए।’




