गाजीपुर
NK9:सह संपादक
फदनपुर गांव में मौत को दावत दे रहा ट्रांसफार्मर, मासूम बच्चों की सुरक्षा पर खतरा
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, एक्स पर शिकायत के बाद भी ग्रामीणों को इंतजार
गाजीपुर। जनपद के फदनपुर गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ग्रामीणों के लिए खतरा बनी हुई है। गांव में लगा ट्रांसफार्मर और नीचे तक लटक रहे बिजली के तार किसी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक समस्या का समाधान नहीं किया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, स्थानीय स्तर पर बिजली विभाग से लगातार संपर्क कर ट्रांसफार्मर और लटकते तारों की समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई का निर्देश दिए जाने के बावजूद क्षेत्रीय बिजली विभाग के जेई रमाशंकर की ओर से समस्या का समाधान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जेई ने उनसे यह पूछा कि वह कौन हैं, लेकिन इसके बाद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
प्राथमिक विद्यालय के बच्चों पर मंडरा रहा खतरा
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय की छुट्टी होने के बाद छोटे बच्चे घर लौटते समय ट्रांसफार्मर के आसपास खेलते रहते हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। गांव में बिजली के तार भी काफी नीचे लटकने की बात कही जा रही है, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है।
जिलाधिकारी को टैग कर की गई शिकायत
शिकायतकर्ता ने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को भी एक्स पर टैग कर शिकायत की है। ग्रामीणों का कहना है कि जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव में इस तरह की समस्या का बने रहना चिंताजनक है। उनका सवाल है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर क्यों नहीं जा रहा है।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग से तत्काल ट्रांसफार्मर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराने, लटकते तारों को ठीक कराने और संभावित हादसे को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि बिजली विभाग किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करता है या नहीं। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस मामले में तत्काल निरीक्षण और आवश्यक सुधार की जरूरत है।




