मोहर्रम का महीना प्रारम्भ, शहर में मना इमाम हुसैन का ग़म। लाट सरैया 600 साल पुराने इमामबाड़े में उठा जुलूस

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संवाद दाता:-सलीम जावेद 

वाराणसी 17 जून, 2026 आज शहर में मोहर्रम माह के प्रारंभ होते ही ग़म का माहौल बन गया। शहर में मुसलमानों के घर अज़ाखाने सज गए हैं, जहाँ अगले 12 दिनों तक इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के कत्ल का ग़म बडी शिद्दत के साथ मनाया जाएगा।

आज तक हम कर्बला की दास्तान भूले नहीं, ये ज़मीन भूले नहीं आसमान भूले नही

पहली मोहर्रम को सदर इमामबाड़े में इमाम हुसैन का जुलूस उठाया गया। जुलूस के संयोजक सज्जाद अली रहेl सह संयोजक सलमान हैदर ने यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जुलूस के उठने से पहले मजलिस को मौलाना राहिब अली ने खिताब किया, जबकि सज्जाद हुसैन और फ़ैयाज़ हुसैन ने कलाम पेश किए। जुलूस में कई अंजुमनों—हुसैनिया, सज्जादिया, अबिदिया और हाशिमिय्या—ने नौहा ओ मातम किया।

अज़ाखाने के मोतावल्ली सज्जाद अली गुज्जन ने अजादारों का इस्तेकबाल किया। शामिल रिज़वी तथा जफर इमाम इंतेजामिया के मुख्य सदस्य रहे, जबकि सरताज अली, रेहान अली, अलमदार हुसैन और जावेद हुसैन भी इसमें शामिल रहे। पिछले 20 सालों से उठ रहे इस जुलूस में अब बहुत अधिक संख्या में अजादार आते हैं।

पूरे शहर में भी अज़ादारी प्रारम्भ हो चुकी है। रामनगर, फातमान, पितरकुण्ड, दालमंडी, भेलुपुरा, शिवपुर, दोशीपुरा, पठानी टोला, कच्ची बाग़ और चौहट्टा आदि क्षेत्रों में जमकर अज़ादारी हुई। सुबह फातमान में मौलाना जफ़र रज़ा ने बेहतरीन मजलिस को खिताब किया, वहीं हकीम मोहम्मद काज़िम के अज़ाखाने पर वासी मोहम्मद पाशा साहब ने मजलिस को संबोधित किया।

सलमान हैदर ने बताया कि वाराणसी की 29 अंजुमने पूरे जोश-ओ-खरोश से अज़ादारी करती हैं। कल 18 जून को (2 मोहर्रम) शिवपुर में अंजुमन पंजतनी ज़ुल्जनाह का जुलूस हर साल की तरह उठाएगी।