रसड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाल, मरीजों को मजबूरी में जाना पड़ रहा प्राइवेट अस्पताल
संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा 
रसड़ा (बलिया):
गाजीपुर और मऊ जिले की सीमा से सटे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रसड़ा पर हजारों मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन समुचित चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में यहां आने वाले मरीज निराश होकर निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो जाते हैं।
सबसे बड़ी समस्या अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी है। बरसों से यहां कोई विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं है। कई बार चिकित्सक न मिलने से छोटे बच्चों की जान तक चली जाती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बच्चों की जान बचाने के लिए यहां तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति जरूरी है।
इसके अलावा अस्पताल में पर्याप्त बेड की व्यवस्था नहीं है। हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात होने के बावजूद प्लास्टर सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टरों और मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगना जरूरी है। वहीं, जनरेटर न होने की वजह से बिजली कटते ही डॉक्टरों को अंधेरे में इलाज करना पड़ता है। इतना ही नहीं, अस्पताल में डिजिटल एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं भी नदारद हैं।
इन हालातों के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रसड़ा केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि “जब अस्पताल ही बीमार हालत में हो तो मरीजों का इलाज कैसे करेगा।”
इन्हीं मांगों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता विश्वजीत जायसवाल ने आज रसड़ा तहसील पर आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर अस्पताल में सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।




