मानवीय संवेदनाओं में मिसाल बनी एनएससीटी, सातवें सहयोग में दिवंगत सदस्य के परिजनों को 14.33 लाख की मदद। संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा 

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मानवीय संवेदनाओं में मिसाल बनी एनएससीटी, सातवें सहयोग में दिवंगत सदस्य के परिजनों को 14.33 लाख की मदद।

संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा

रसड़ा/बलिया। सामाजिक एवं आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में कार्यरत नेशनल सेल्फ केयर टीम (एनएससीटी) ने मानवीय सहयोग की एक और मिसाल पेश की है। संस्था ने अपने सातवें सहयोग के तहत प्रयागराज की दिवंगत सदस्य प्रीति कुशवाहा के नामिनी शुभम कुशवाहा को 14 लाख 33 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह राशि संस्था के सदस्यों द्वारा महज 50-50 रुपये के सहयोग से जुटाई गई।

एनएससीटी के इस मानवीय अभियान में बलिया जनपद के 1104 सदस्यों ने भी अपनी सहभागिता निभाई। संस्था का कहना है कि छोटी-छोटी सहयोग राशि जब सामूहिक संवेदना से जुड़ती है तो जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ा संबल बन जाती है।

बुधवार को जानकारी देते हुए एनएससीटी के बागी बलिया जिलाध्यक्ष उमेश राम कन्नौजिया ने बताया कि संस्था के संस्थापक वरिष्ठ शिक्षक विवेकानंद, सह संस्थापक सुदेश पांडेय, संजीव रजक, संस्थापक मंडल की बबीता वर्मा, संगठन मंत्री अंकिता शुक्ला, डॉ. फारूक, प्रदेश अध्यक्ष अनिल वर्मा, प्रांतीय सचिव सन्नी सिंह और प्रदेश कोषाध्यक्ष वेद निमेष सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों के निर्देशन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के सदस्यों ने सातवें सहयोग को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सात सहयोग, हर बार बढ़ता गया संबल

एनएससीटी की सहयोग यात्रा पर नजर डालें तो संस्था ने प्रत्येक सहयोग के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है

– पहला सहयोग: 6 लाख रुपये से अधिक

– दूसरा सहयोग: 6.50 लाख रुपये से अधिक

– तीसरा सहयोग: 7 लाख रुपये से अधिक

– चौथा सहयोग: लगभग 7.50 लाख रुपये

– पांचवां सहयोग: लगभग 8 लाख रुपये

– छठवां सहयोग: 10.21 लाख रुपये

– सातवां सहयोग: 14.33 लाख रुपये

  1. लगातार बढ़ती सहयोग राशि यह दर्शाती है कि संस्था के सदस्यों में आपसी विश्वास, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदना की भावना मजबूत हो रही है। एनएससीटी का यह प्रयास केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में किसी परिवार के साथ खड़े होने की सामाजिक सोच को भी मजबूत करता है।

50 रुपये का छोटा सहयोग, 14.33 लाख का बड़ा सहारा—एनएससीटी ने फिर साबित किया कि सामूहिक संवेदना से किसी परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।