मानवता की मिसाल बने डॉ. ए.एन. राय: मरीजों के लिए देवदूत साबित हो रहे लाटघाट स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी

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संवाददाता : आशीष सिंह राठौर
लाटघाट, आजमगढ़ : क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बात हो और लाटघाट स्वास्थ्य केंद्र, आजमगढ़ का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं। इस स्वास्थ्य केंद्र की पहचान आज डॉ. ए.एन. राय, चिकित्साधिकारी, M.B.S. के नाम से बन गई है। अपनी मृदुभाषी शैली और मरीजों के प्रति समर्पण के कारण डॉ. राय आज पूरे क्षेत्र के लोगों के दिलों में बस गए हैं।

मरीजों के लिए डॉक्टर से ज्यादा परिवार के सदस्य

डॉ. राय की सबसे बड़ी खूबी है उनका मरीजों से व्यवहार। रोज सैकड़ों की संख्या में दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को वे न केवल दवा देते हैं, बल्कि धैर्यपूर्वक उनकी बात भी सुनते हैं। गरीब और असहाय मरीजों के प्रति उनका व्यवहार देखकर लगता ही नहीं कि आप किसी सरकारी अस्पताल में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “डॉक्टर साहब फीस नहीं, दुआ लेते हैं।” चाहे कितनी भीड़ हो, वे बिना झुंझलाए हर एक मरीज को समय देते हैं और सही इलाज बताते हैं।

कार्यशैली से बदली स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर

डॉ. राय के आने के बाद लाटघाट स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। समय से ओपीडी, साफ-सफाई और मरीजों की नियमित देखभाल के कारण अब लोग निजी अस्पतालों के महंगे इलाज को छोड़कर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर भरोसा कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र के बाहर लगी लंबी कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि क्षेत्र के लोग उन पर कितना भरोसा करते हैं। आपातकालीन स्थिति में भी डॉ. राय मरीजों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

क्षेत्रवासियों की जुबां पर एक ही नाम

गांव-गांव में आज चर्चा है कि लाटघाट में एक ऐसे डॉक्टर हैं जो भगवान का रूप हैं। प्रसव, बुखार, दुर्घटना से लेकर गंभीर बीमारियों तक में डॉ. राय ने कई लोगों की जान बचाई है। इसी कारण क्षेत्र की जनता उन्हें “धरती के फरिश्ता” कहकर संबोधित करती है। स्वास्थ्य विभाग की इस मेहनत और लगन को देखकर क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि डॉ. ए.एन. राय जैसे समर्पित चिकित्सकों को सम्मानित किया जाए, ताकि और लोग भी उनसे प्रेरणा ले सकें। लाटघाट स्वास्थ्य केंद्र आज सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि डॉ. ए.एन. राय के भरोसे का प्रतीक बन चुका है।