कालीमहल में जर्जर मकान बना खतरे का सबब, बारिश में भरभराकर गिरीं ईंटें—बड़े हादसे के इंतजार में जिम्मेदार विभाग?

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संवाद दाता:-नियाज खान 

वाराणसी। कालीमहल स्थित पानदरीबा चौराहे पर एक पुराना और जर्जर मकान इन दिनों राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। मकान संख्या 11/24 काफी समय से जर्जर हालत में है और इसके किसी भी हिस्से के कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है।

बारिश के दौरान आज अचानक मकान की दो ईंटें भरभराकर नीचे गिर गईं। गनीमत रही कि उस समय वहां से गुजर रहे किसी व्यक्ति को चोट नहीं लगी और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह मकान काफी पुराना है और लंबे समय से इसकी हालत खराब बनी हुई है। दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं, जबकि बारिश के कारण भवन की स्थिति और भी कमजोर हो गई है। लोगों का कहना है कि मकान का कोई हिस्सा अचानक गिर सकता है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

जिस स्थान पर यह जर्जर मकान स्थित है, वहां दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। पानदरीबा चौराहा और आसपास का बाजार काफी व्यस्त रहता है। यहां स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले लोग भी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि मकान का बड़ा हिस्सा अचानक गिरता है, तो कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

बारिश के दौरान ईंटें गिरने की घटना ने जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक इस जर्जर भवन को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

लोगों का सवाल है कि आखिर नगर निगम और वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारी इस मामले का संज्ञान कब लेंगे? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते भवन की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिम्मेदार विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण कर भवन की स्थिति का आकलन करें। यदि मकान रहने या आसपास की आवाजाही के लिए खतरनाक है, तो उसे सुरक्षित तरीके से गिराने या आवश्यक मरम्मत कराने की कार्रवाई की जाए। साथ ही, हादसे की आशंका को देखते हुए भवन के आसपास सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएं।

लोगों का कहना है कि प्रशासन को किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय समय रहते कदम उठाना चाहिए, ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक जर्जर मकान के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाती है।