21 रमजान को इमाम अली की याद में अंजुमन जफरिया दोषीपुरा मे हज़रत अली का अलम ताबूत का उठा जुलूस, फिजा में गूंजी या अली की सदायें अजादारों ने की सीनाजनी

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संवाद दाता:- सलीम जावेद 

वाराणसी। दिनांक 11/03/2026 शिया समुदाय के पहले इमाम रसूल-अल्लाहे सलल्लाहे वा एलैहे वस्ल्लम के दामाद इमाम हज़रत अली की शहादत की याद में दोषीपुरा से तुर्बत जुलूस उठाया गया। जुलूस उठने से पहले मौलाना ने इमाम अली के तलवार लगने के उस वाकये को बयां किया जो इस्लाम में पहली आतंकी घटना थी। जब अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने जहर बुझी तलवार से इमाम अली के सिर पर हमला 19 रमज़ान कि सुब्ह फ़ज़्र की नमाज मे सज्दे मे किया था। इस हमले के बाद इमाम अली की शहादत 21 रमजान 40 हिजरी में हुई थी। शिया मुसलमान 19 रमजान से 21 रमजान तक इमाम अली का गम मनाते हैं। दोषीपुरा के अलावा हुसैनी हाउस और कई जगहों पर भी मजलिस के बाद तुर्बत उठाई गई। फिजा में या अली की सदाएं गूंजती रही।

काजीपुरा दोषीपुरा अपनी पुरानी रवायतों के अनुसार हजरत अली की याद में तुर्बत का जुलूस उठाया गया। जुलूस उठने से पहले मौलाना ने मजलिस पढ़ी। उन्होंने कहा 40 हिजरी में इमाम अली ईराक के शहर कूफा में रहते थे।

मस्जिदे कूफा में रोजाना नमाज पढ़ते थे। 40 हिजरी की 19 रमजान की सुबह जब वो सुबह की नमाज पढ़ रहे थे और सजदे में थे उसी समय उनके दुश्मनों ने मस्जिद के अंदर नमाज की हालत में इमाम अली पर जहर बुझी तलवार से हमला कर दिया। ये सुनकर वहां मौजूद लोग जारो कतार रोने लगे।

अपने कातिल को खुद जगाया

 19 रमजान सन 40 हिजरी को जब इमाम अली फज्र की नमाज पढ़ने के लिए कूफा की मस्जिद में पहुंचे तो उनका कातिल अब्दुर्रहमान मस्जिद में सो रहा था। उन्होंने उसे जगाया और कहा की नमाज का वक्त है सोना कैसा।

इसके बाद उस आतंकी अब्दुर्रहमान इब्ने मुल्जिम ने मौक़े की तलाश कर नमाज के सजदे की हालत मे उनके ऊपर जहर बुझी तलवार से हमला किया। जिसके बाद उनके सिर से खून निकलने लगा। लोगों ने कातिल को पकड़कर अली के सामने पेश किया पर उन्होंने उस वक्त भी उसके जिसमे बंधी रस्सी खुलवा दी। ऐसे में हमें इमाम अली की जिंदगी और मौत दोनों से सीख लेनी चाहिए।

अंजुमन जफरिया दोषीपुरा बनारस ने की नौहाख्वानी वा मातम करते जुलूस उठने पर अंजुमन जफरिया दोषीपुरा बनारस ने नौहाख्वानी वा मातम किया।

नौहा- फलक पर सुबह का तारा तुलु (निकलता) है।

खुदा के सजदे में साजिद शहीद होता है। 

पड़े हैं गश में अली खून में नहाए हुए, 

के जुल्फेकार के साये में शेर सोया है।

पुकारते हैं नमाजी अली शहीद हुए।

 जहां में हश्र बपा है हर एक रोता है; 

की सदा के साथ जुलूस आगे बढ़ा। जुलूस अपने कदीमी रास्तों दोषीपुरा, काजीपुरा, बड़ीबाजार, कमलापुरा, छः मोहानी, धनेसरा, हनुमान फाटक चौकी होते हुए सरैया कर्बला ईमाम बारगाह में समाप्त हुआ।

हुसैनी हाउस में भी हुई मजलिस, उठी तुर्बत इमाम अली जब जख्मी हालत में घर पहुंचे तो कोहराम मच गया। उनकी बेटियां जनाबे जैनब और जनाबे कुलसूम की चीखें निकल गयीं। हज़रत अली की 21 रमजान को शहादत हो गई। ये सुनकर वहां मौजूद लोग रोने लगे। बाद मजलिस तुर्बत उठाई गई। यातायात व्यवस्था एवं शांति व्यवस्था में सहयोग हेतु समाज सेवा सोसाइटी के वालिंटियर जिला पुलिस प्रशासन के साथ उपस्थित रहे।