संचालन से संगठन तक हर नाम बना पहचान” परशुराम जन्मोत्सव में दिखी एकता की ताकत

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आजमगढ़ मंडल ब्यूरो हेड रामनरायन राय उर्फ बबलू राय की खास रिपोर्ट

संचालन से संगठन तक हर नाम बना पहचान” परशुराम जन्मोत्सव में दिखी एकता की ताकत

आजमगढ़ जनपद के भीमबर बाजार स्थित राधा कृष्ण मैरिज हॉल में आयोजित भगवान परशुराम जन्मोत्सव का भव्य कार्यक्रम संचालन और संगठन की मिसाल बनकर उभरा, जहाँ हर व्यक्ति की भूमिका ने आयोजन को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।
कार्यक्रम का संचालन अभिषेक राय ने बेहद प्रभावशाली ढंग से किया। उनके संतुलित और अनुशासित संचालन ने पूरे कार्यक्रम को एक सूत्र में बांधे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आत्मा राय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आरपी राय एवं केदारनाथ राय उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि रंजन राय और गुलाब राय द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
मंचासीन विद्वानों में प्रो. डॉ. प्रशांत राय, बृजेश राय (जिला मंत्री, शिक्षक संगठन), प्रो. बिजेंद्र राय, प्रिंसिपल अनिल राय, प्रबंधक अमरीश राय, डायट प्राचार्य अमरनाथ राय, जितेंद्र राय सहित कई वक्ताओं ने भगवान परशुराम, महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के आदर्शों पर प्रकाश डाला।
संगठन की मजबूती कार्यक्रम में स्पष्ट दिखाई दी, जहाँ राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष डॉ. के. एन. राय, राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र राय ‘बबलू’, राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. दिवाकर राय, राष्ट्रीय प्रवक्ता त्रिलोकी नाथ राय, प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुमार राय, प्रदेश महामंत्री प्रभाकर राय, जिला अध्यक्ष विवेक सिंह, आलोक राय (जिला महामंत्री), पंकज राय, मनीष राय, जिला उपाध्यक्ष राकेश राय, प्रिंस राय, हरिवंश राय, कोषाध्यक्ष विजय राय, रामानुज राय, मंत्री विक्की राय, अनुराग देव राय, संजय राय (संरक्षक), ब्लॉक अध्यक्ष उमेश राय, सिंटू राय, शुभम राय, बंटी राय के साथ-साथ अशोक राय, कौशल राय, रामवचन राय, बृजेश राय, कमलेश राय, राजेश राय, दीनानाथ राय, मनोज राय, रिंकू राय समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।
हर पदाधिकारी और कार्यकर्ता ने अपने-अपने दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाया—चाहे वह मंच संचालन हो, अतिथियों का स्वागत हो या व्यवस्था संभालना। यही कारण रहा कि हजारों लोगों की उपस्थिति के बावजूद कार्यक्रम अनुशासित और सफल रहा।
यह आयोजन एक मजबूत संदेश देकर गया कि जब हर नाम जिम्मेदारी के साथ जुड़ता है, तब संगठन एक शक्ति बन जाता है।
परशुराम जन्मोत्सव का यह आयोजन वास्तव में संस्कार, एकता और सामूहिक प्रयास की जीवंत मिसाल बनकर सामने आया।