बसपा से भाजपा में आए अरविंद मौर्य बने भाजपा जिलाध्यक्ष

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बाराबंकी: भारतीय जनता पार्टी ने अरविंद मौर्य को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। दो साल पहले अचानक जिलाध्यक्ष अवधेश श्रीवास्तव को हटाकर शशांक कुसमेश को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। जिलाध्यक्ष पद पर नई तैनाती को लेकर दो महीनों से उठापटक चल रही थी। इसे लेकर जिले के छोटे और बड़े सभी नेता गुटों में बंटे नजर आए। कुछ अपने चहेतों को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए तो कुछ ने कुर्सी बचाने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दौड़ लगाई। जिले में आए पर्यवेक्षक के सामने भी ये नजारा देखने को मिला था। इस दौड़ में संगठन के वर्षों पुराने कार्यकर्ता शामिल थे। मगर पार्टी ने जिला महामंत्री अरविंद मौर्य पर भरोसा जताया। शुक्रवार को उनके नाम की घोषणा होते ही बधाई देने वालों का तांता लग गया। वहीं, अंदर ही अंदर विरोधी स्वर भी मुखर होने लगे। यह बातें सोशल मीडिया पर भी खूब चल रही हैं। भाजपा के नए जिलाध्यक्ष को जिले में पार्टी के बीच पनपी गुटबाजी रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।

दागी पर मुहर, नेतृत्व पर सवाल
अरविंद मौर्य 2017 से पहले बसपा में थे। भाजपा में शामिल होने के बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने इनको बाराबंकी सदर सीट से अपना प्रत्याशी बनाया, मगर उनके ऊपर आपराधिक मामला दर्ज होने तथा सजा मिलने को लेकर विपक्षियों ने तंज कसना शुरू कर दिया। पार्टी हाईकमान ने इसे गंभीरता से लिया था। अरविंद मौर्य का नामांकन पत्र रद्द होने की आशंका में आननफानन इनका टिकट वापस लिया। अरविंद मौर्य की शिक्षक पत्नी राजकुमारी मौर्य ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दिया और पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया। हालांकि चुनाव सपा के सुरेश यादव ने तीसरी बार जीत लिया। ऐसे में नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। 25 जुलाई 2019 को अपर सत्र न्यायाधीश ने एनडीपीएस एक्ट में अरविंद मौर्य को 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। जुर्माना न अदा करने पर छह माह के कारावास की सजा से दंडित करने का आदेश दिया था, जिसके बाद जुर्माना जमा किया गया था।

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