रिपोर्ट- नीरज शुक्ला (रामनगर बाराबंकी)
कस्बा रामनगर के मोहल्ला धमेडी दो निवासी त्रिवेणी दत्त मिश्र के यहां चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस पर भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण अत्यंत मनोहर कारी रहा।
श्री वृंदावन धाम से पधारे आचार्य अखिलेश जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को आनन्दित कर दिया।
उन्होंने बताया कि अक्रूर जी के साथ भगवान श्रीकृष्ण का मथुरा गमन ब्रजवासियों के लिए अत्यंत विरह का क्षण था। इसी विरह को शांत करने के लिए भगवान ने उद्धव जी को ब्रज भेजा, जहाँ गोपी–उद्धव संवाद प्रेम, समर्पण और भक्ति की सर्वोच्च मिसाल के रूप में सामने आया।
महाराज जी की वाणी में गोपियों के प्रेम का चित्रण सुनकर श्रोता भावुक हो उठे।
इसके पश्चात आचार्य श्री ने कंस वध का अद्भुत और रोमांचकारी प्रसंग सुनाया।
श्रीकृष्ण द्वारा कंस का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना किए जाने पर कथा पंडाल “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
अंत में महाराज जी ने रुक्मिणी–कृष्ण विवाह की रसपूर्ण कथा सुनाई। रुक्मिणी जी का प्रेम-पत्र, उनका अटूट विश्वास और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी हरण कर विवाह सम्पन्न करना—इन प्रसंगों ने उपस्थित भक्तों के हृदय को भक्ति-रस से भर दिया।कथा के दौरान श्रोताओं ने भक्ति के स्वर लहराते हुए दिव्य वातावरण को और भी पावन बना दिया। समस्त मिश्रा परिवार सहित दिनेश चंद शुक्ला ‘चंदन गुप्ता, अनुज जायसवाल’ हरिहर पांडेय सहित तमाम कस्बा वासियों ने कथा का रसपान किया।




