*आजादी के अमृत महोत्सव की हकीकत,जहां महात्मा गांधी चबूतरे का पिलर किसी भी समय हो सकता है धराशाही,44 अंग्रेजो को अकेले ढेर करने वाले तीन रणबांकुरो की शहादत का किया जा रहा अपमान*

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सवांदाता सत्यवान सिंह चौहान (जौनपुर)

शहीद स्तंभ को किस तरह स्थानीय जनता व गैरजिम्मेदार अधिकारी जनप्रतिनिधि कैसे तिरस्कृत करते है उसका जीता जागता उदाहरण जिले के मुफ्तीगंज ब्लाक क्षेत्र के मुफ्तिगंज के मध्य बाजार में स्थित महात्मा गांधी चौतरा से लगभग कुछ ही दूरी पर बने शहीद स्तंभ को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।महात्मा गांधी के चौतरे का पिलर जर्जर अवस्था में है किसी भी समय गिर सकता है अगल बगल कूड़ो का अंबार लगा हुआ है पर नाही किसी स्थानीय ने इसकी जिम्मेदारी लेना उचित समझा ना ही प्रशासन के द्वारा ही जर्जर अवस्था पड़े पिलर को मरम्मत करवाना ही उचित समझ रहे है।हम भारतवासी महात्मा गांधी को बड़े ही सम्मान के साथ राष्ट्रपिता कहते है पर मुफ्तीगंज के मध्य बाजार में स्थिति गांधी प्रतिमा देखकर हकीकत कुछ और ही बयां करती है इसे इस देश का दुर्भाग्य कहे या कुछ और आखिर कब तक आजाद भारत में महापुरूषों व शहीदों का अपमान होता रहेगा

*शहीद स्तंभ के अगल बगल लगा है कूड़ो का अंबार,जिम्मेदार बेखबर*

बता दें कि क्रांतिकारी जंग बहादुर पाठक पुत्र हरिभजन निवासी पाठखौली, शिवनाथ पुत्र मथुरा निवासी तारा व क्षत्रधारी पुत्र उमाचरन निवासी विजयीपुर ने कभी भी अंग्रेजों की अधीनता को स्वीकार नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जंग-ए-आजादी में कूद पड़े और 44 अंग्रेजों को तीनों क्रांतिकारियों ने जौनपुर शाही पुल के पास मार गिराया था।जिसके बाद अंग्रेजी शासकों ने खलबली मच गई अंग्रेजी हुकूमत अपनी कूटनीति बदौलत धोके से तीनों क्रांतिकारियों को पसेवा गांव के समीप पकड़कर एक महीने के कारावास में रखकर उनके साथ बर्बता की सारी हदें पार कर दी जिससे कारण उनका निधन हो गया। उनकी वीरता व शौर्य की याद में मुफ्तीगंज बाजार के मध्य में शहीद स्तम्भ का निर्माण कराया गया है पर आज भी शहीद स्तंभ के अगल बगल कूड़ो का ढेर लगा हुआ है।जिसे देखकर दुःख होता है सबसे खास बात जिला मुख्यालय व केराकत तहसील के मुख्य मार्ग पर स्थित होने से अधिकारियो व जनप्रतिनिधि का आना जाना लगातार लगा रहता है विगत महीने में इसी रास्ते से होकर पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति निर्मला एस मौर्य व खेलमंत्री गिरीश चंद यादव का काफिला शहीद स्मारक सेनापुर में पहुंच शहीदों के प्रति कशीदे पड़े गए पर वापस लौटते समय मुफ्तीगंज के मध्य बाजार में शहीद स्तंभ पर श्रद्धा सुमन अर्पित करना तो दूर की बात रही शहीद स्तंभ के अगल बगल लगे कूड़े के अंबार पर ध्यान आकृष्ट नही हुआ जो विचारणीय योग्य बात है।