रिपोर्ट- नीरज शुक्ला (रामनगर बाराबंकी)
सुप्रसिद्ध तीर्थ स्थल लोधेश्वर महादेवा में चल रहे अगहनी मेला के अंतिम दिन रविवार रात मणिकर्णिका घाट की विश्व-प्रसिद्ध मसाने की होली का दिव्य उत्सव शुरू हुआ। बनारस से आए कलाकारों ने माता पार्वती का गौना कराकर अपने धाम लौटे। बाबा विश्वनाथ के साथ नंदी, श्रृंगी, भृंगी तथा भूत-प्रेतों के संग जलती चिताओं की भस्म से अद्भुत होली खेली।
इस दौरान हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा घाट गूंज उठा। कलाकारों के तांडव नृत्य पर “होली खेले मसाने” जैसे गीतों की धुन पर माहौल शिवमय हो गया। डमरुओं की निनाद के बीच नागा साधुओं और नरमुंडों की माला धारण किए अघोरियों ने बाबा मसाननाथ के साथ चिता-भस्म की होली खेलकर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।
इसके बाद कलाकारों ने सती और भगवान शिव की कथा का मंचन किया जिसमें दक्ष के यज्ञ में सती का अपमान, सती का हवन कुंड में समाहित होना, शिव की प्रलय लीला और भगवान विष्णु द्वारा सती के 51 खंड किए जाने का प्रसंग शामिल रहा। जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला जज प्रतिमा श्रीवास्तव, सीजेएम सुधा सिंह और एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर एएसपी विकास त्रिपाठी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल, संस्कृति सोमान, तहसीलदार विपुल कुमार सिंह, सीओ गरिमा पंत, नायब तहसीलदार विजय प्रकाश तिवारी, के.के. जैन सहित कई अधिकारी एवं गणमान्य मौजूद रहे।




