मनरेगा बहाली व 200 दिन रोजगार की मांग को लेकर खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन का ज्ञापन
जखनियां (गाजीपुर)।
उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन जखनियां–गाजीपुर इकाई द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। यूनियन की ओर से राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी जखनियां के माध्यम से सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया कि मनरेगा ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार की गारंटी का एकमात्र सशक्त कानून है, लेकिन वर्तमान में सरकार द्वारा इसे कमजोर किया जा रहा है। बीते वर्षों में मनरेगा के बजट में कटौती की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संकट गहराता जा रहा है। यूनियन ने आरोप लगाया कि बीते वित्तीय वर्ष में मनरेगा बजट का लगभग 40 प्रतिशत राज्यों पर डाल दिया गया, जबकि अधिकांश राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
यूनियन नेताओं ने बताया कि बी राम जी कानून के तहत 125 दिन रोजगार देने की बात कही जा रही है, जो मनरेगा के मूल उद्देश्य के विपरीत है। इससे ग्रामीण मजदूरों के बीच बेरोजगारी बढ़ेगी और उनके परिवारों का भरण-पोषण कठिन हो जाएगा। साथ ही काम के दौरान दुर्घटना होने पर मजदूरों के भविष्य की कोई ठोस गारंटी भी नहीं रह जाएगी।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार से तीन सूत्री मांगें रखी गईं।
पहली— मनरेगा को तत्काल बहाल करते हुए इसके बजट आवंटन स्पष्ट रूप से बढ़ाकर तीन लाख करोड़ रुपये किया जाए।
दूसरी— मनरेगा के अंतर्गत साल में 200 दिन रोजगार की गारंटी दी जाए तथा मजदूरी की दर 700 रुपये प्रतिदिन घोषित कर बकाया मजदूरी का भुगतान शीघ्र कराया जाए।
तीसरी— बीजी राम जी कानून पर तत्काल रोक लगाई जाए।
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही मांगों पर विचार नहीं किया गया और मनरेगा को बहाल नहीं किया गया तो उत्तर प्रदेश खेत ग्रामीण मजदूर यूनियन बाध्य होकर आंदोलन करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी भारत सरकार एवं प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर यूनियन के जिलाध्यक्ष एवं जिला सचिव सहित कई मजदूर नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।




