मिर्जापुर में पेट्रोल पंपों पर बढ़ती धोखाधड़ी: ट्रांसपेरेंट पाइप और मीटर अनियमितताओं की जांच की मांग

Social

संवाद दाता:-सिद्धांत बच्चन 

मिर्जापुर, अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद में पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि पंपों पर ट्रांसपेरेंट पाइप नहीं लगे होने से यह पता नहीं चलता कि पेट्रोल वास्तव में वाहन में जा रहा है या नहीं। इसके अलावा, षमीटर शुरू होने पर ‘सर्विस चार्ज’ के नाम पर शुरुआती राशि अलग-अलग दिखाई देती है—कहीं ₹3 से, कहीं ₹4 या ₹5 से शुरू होती है, जो मानकों के विपरीत है।

 यह स्थिति उपभोक्ताओं को ठगा हुआ महसूस कराती है और पुरानी घटनाओं की याद दिलाती है, जहां मीटर टैंपरिंग से लाखों रुपये की चोरी हुई थी।मिर्जापुर में यह समस्या नई नहीं है। 2017 में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मिर्जापुर सहित कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर छापेमारी की थी, जहां इलेक्ट्रॉनिक चिप्स के जरिए मीटर टैंपरिंग पाई गई और ग्राहकों को कम ईंधन दिया जा रहा था।

विभिन्न समाचार पत्रों में छपी खबरो के अनुसार , ऐसी धोखाधड़ी हर स्तर पर हो रही है, और जांच की कमी से समस्या बनी हुई है।

हाल ही में, उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में फर्जी QR कोड के जरिए पेट्रोल पंपों पर साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जो मिर्जापुर जैसे जिलों में भी फैल सकता है।

ट्रांसपेरेंट पाइप की कमी एक प्रमुख मुद्दा है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें काले होसेस को ट्रांसपेरेंट पाइप से बदलने की मांग की गई ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके।

 हालांकि, यह अनिवार्य नहीं है क्योंकि ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक पाइप से स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी का खतरा होता है, जो आग का कारण बन सकता है।

फिर भी, उपभोक्ता संगठन इसकी मांग कर रहे हैं, और इंडियन ऑयल की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस में होसेस की दैनिक जांच अनिवार्य है।

मीटर अनियमितता पर बात करें तो, भारत में पेट्रोल पंपों पर कोई फिक्स्ड सर्विस चार्ज नहीं है। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 और लीगल मेट्रोलॉजी (जनरल) रूल्स, 2011 के तहत मीटर हमेशा शून्य से शुरू होना चाहिए और हर 6 महीने में सत्यापन अनिवार्य है।

 यदि मीटर टैंपरिंग पाई जाती है, तो यह दंडनीय अपराध है। क्रेडिट/डेबिट कार्ड पर 1-2.5% सरचार्ज लग सकता है, लेकिन कैश में नहीं, और सरकार इस पर स्पष्ट निर्देश नहीं दे पाई है।

उत्तर प्रदेश लीगल मेट्रोलॉजी (एन्फोर्समेंट) रूल्स, 2011 में सभी माप-तौल यंत्रों का सत्यापन जरूरी है।

पंपों पर 5 या 10 लीटर का वेरिफाइड मेजर रखना चाहिए ताकि उपभोक्ता जांच कर सके। पेट्रोलियम एक्ट, 1934 के तहत पंपों को नियंत्रित किया जाता है, और नियमों का प्रदर्शन हिंदी व अंग्रेजी में अनिवार्य है, जिसमें शिकायत बुक और टोल-फ्री नंबर शामिल हैं। मिर्जापुर में इन नियमों का पालन न होने से उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।उपभोक्ताओं को सलाह है कि मीटर शून्य से शुरू होने की जांच करें और संदेह पर लीगल मेट्रोलॉजी विभाग या उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं। जिला प्रशासन से मांग है कि सभी पंपों की जांच कर ट्रांसपेरेंट पाइप के सुरक्षित विकल्प अपनाएं और अनियमितताओं पर रोक लगाएं। सरकार और तेल कंपनियों को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता सुरक्षित रहें।