रसड़ा शहर सहित अन्य क्षेत्रों में चल रही है ‘मीठा जहर’ का कारखाना, त्योहारों की सीजन में सक्रिय है काला बाजार, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल।
संवाददाता उमाकांत विश्वकर्मा
रसड़ा, बलिया:
रसड़ा शहर और आस-पास के क्षेत्रों में मिलावटी मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। त्योहारों का समय आते ही यह काला कारोबार और भी अधिक सक्रिय हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह ‘मीठा जहर’ लोगों की थालियों में पहुंच रहा है, और प्रशासन खामोश तमाशबीन बना हुआ है।
*त्योहारों पर बढ़ती मिलावटखोरी*
दीपावली, रक्षाबंधन और अन्य पर्वों के समय मिठाइयों और नमकीनों की मांग में ज़बरदस्त बढ़ोतरी होती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ लालची व्यापारी नकली खोया, सिंथेटिक दूध, रंगीन रसायन और अन्य हानिकारक केमिकल से मिठाइयाँ तैयार कर रहे हैं। ये मिठाइयाँ देखने में तो आकर्षक होती हैं, लेकिन अंदर से ज़हर से कम नहीं।
*स्थानीय जनता में बढ़ रहा आक्रोश*
स्थानीय निवासी अशोक गुप्ता ने बताया, “प्रशासन सब जानता है, लेकिन कार्रवाई नहीं करता। हम अपने बच्चों को मिठाई देने से डरते हैं। यह मिठाई नहीं, मीठा ज़हर है।”
लोगों का कहना है कि कई ऐसे स्थान हैं जहां खुलेआम नकली सामग्री से खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं, लेकिन न तो कोई छापा पड़ता है और न ही किसी की गिरफ़्तारी होती है।
*स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल*
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल खानापूर्ति की जाती है—कुछ दुकानें सीज़, कुछ नमूने इकट्ठा, और उसके बाद फिर वही ढर्रा। कोई स्थायी समाधान या नियमित निगरानी नहीं की जाती। नतीजा यह है कि मिलावटखोरी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
*क्यों नहीं होती ठोस कार्रवाई?*
समझा जा रहा है कि प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों के बीच मिलीभगत के चलते यह अवैध धंधा बेरोकटोक चल रहा है। त्योहारों में जहां लोगों को खुशियाँ बांटनी चाहिए, वहीं ये कारोबारी ज़हर परोस रहे हैं।
रसड़ा और आसपास के क्षेत्र में त्योहारों के मौके पर मिलावटी मिठाइयों और खाद्य पदार्थों का काला कारोबार लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। प्रशासन की चुप्पी और स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है। अब समय आ गया है कि जनता आवाज़ उठाए और इस ‘मीठे जहर’ के खिलाफ सख़्त कदम उठाने की माँग करे।




