
बाराबंकी/लखनऊ: CBI लखनऊ की ऐंटी करप्शन ब्रांच ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) के तीन इंस्पेक्टरों के रिश्वत लेने के मामले में गुरुवार को दो और गिरफ्तारियां की है। गिरफ्तार आरोपितों में बाराबंकी ड्रग असोसिएशन के जिलाध्यक्ष संतोष जायसवाल और दवा दुकान संचालक सुनील जायसवाल शामिल हैं। CBI ने मंगलवार को इंस्पेक्टर महिपाल सिंह, रवि रंजन, आदर्श नेगी और देवा नर्सिंग होम संचालक गयासुद्दीन अहमद को अरेस्ट किया था। एक इंस्पेक्टर सेवा से बर्खास्त , दो को सस्पेंड किया गया।

जिलाध्यक्ष संतोष को CBI की छापेमारी और पड़ताल के बाद गिरफ्तार किया गया है, जबकि सुनील CBI की FIR में पहले से नामजद है। जल्द उसे भी अरेस्ट किया जाएगा। FIR में गयासुद्दीन का बेटा काकुब भी नामजद है। FIR के मुताबिक इंस्पेक्टर महिपाल एक महीने से ग्यासुद्दीन पर घूस देने के लिए दबाव बना रहा था। मंगलवार को ग्यासुद्दीन जब 10 लाख रुपये देने गया तो CBI ने इंस्पेक्टर महिपाल, रवि रंजन, आदर्श नेगी और गयासुद्दीन को अरेस्ट कर लिया था। उधर, CNB ने बुधवार को इंस्पेक्टर महिपाल को सेवा से बर्खास्त कर दिया, जबकि रवि रंजन और आदर्श नेगी को निलंबित किया गया है।सीबीआई ने दो दवा विक्रेताओं को नशीली दवाओं के कारोबार में गिरफ्तार कर अवैध धंधे का खुलासा किया है। सूत्रों के मुताबिक जिले में मॉर्फीन के विकल्प के तौर पर नशीली दवाओं का धंधा काफी गहरा है। जानकार बताते हैं कि हर माह 25 करोड़ से भी ज्यादा की नशीली दवाएं मेडिकल स्टोरों के जरिए बेची जा रही है। वहीं औषधि विभाग और चुनिंदा एजेंसियों की कार्रवाईयां कागजों तक सीमित रह जाती है।महज सात माह पहले ड्रग इंस्पेक्टर ने नगर के वेगमगंज के एक मेडिकल स्टोर से नशीली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी थी, पर उसके नेटवर्क को पहचान कर कार्रवाई करने में एजेंसियों ने खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे ही मार्च 2024 में औषधि विभाग ने एक हाफ डाला को नबीगंज रोड पर पकड़ा था। औषधि विभाग ने कहा था कि कोडिन सीरप की एक खेप लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर से अज्ञात शख्स ने बाराबंकी के लिए भेजी थी, जबकि चालक के पास मिले कागजातों में उसे सीतापुर की फर्जी फर्मों को बेचा जाना दिखाया गया था। इस मामले में चालक के अलावा किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन एसपी दिनेश सिंह का कहना था कि संबंधित सीरप प्रयोगशाला जांच में ओरिजनल पाई गई है, इसके एनडीपीएस का मामला नहीं बनता है।




