पूर्णाहुति पूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का हुआ विश्राम

स्थानीय समाचार

संवाददाता मोनू भारती

मुहम्मदाबाद गोहना मऊ 

मुहम्मदाबाद गोहना, मऊ। स्थानीय तहसील अंतर्गत फतेहपुर में चल रही सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को पूर्णाहुति पूर्वक विश्राम हो गया। हवन-पूर्णाहुति के कार्यक्रम में देश के बड़े संत स्वामी ज्ञानानंद सरस्वतीजी महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए यज्ञ की महिमा बताई और कहा कि यज्ञ का आयोजन बड़े पुण्य से औऱ पुण्यात्मा को ही प्राप्त होता है। यह आयोजन यज्ञकर्ता की विंध्य व ब्रज क्षेत्र की यात्रा का परिणाम है।

सातवें दिन की कथा में कथा प्रवक्ता पंडित महेंशचंद्र ने भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों एवं कृष्ण सुदामा का प्रसंग सुनाया। कहा कि भगवान के परम भक्त और बचपन के सखा सुदामा बड़े ही जितेन्द्रिय ब्राह्मण थे। एक दिन उनकी पत्नी सुशीला ने कहा कि महाराज सुनते हैं कि आपके बचपन के सखा द्वारिकाधीश हैं। क्या कभी आपको उनसे मिलने का मन नहीं करता-? सुदामा ने कहा कि मन तो बहुत करता है पर गुरु, मित्र, संत और देवालय में कभी खाली हाथ नहीं जाया जाता। चूंकि देने के लिए कुछ भेंट नहीं है इसलिए चाहकर भी नहीं जा पाता। पत्नी ने उन्हें चावल मांग कर दिया और वह फटे कपड़ों में ही द्वारिकापुरी पहुंचे। द्वारपालों से कहा कन्हैया को बता दो उनके मित्र सुदामा आये हैं। सुदामा का नाम सुनते ही कहीं पीताम्बर, कहीं बासुरी गिराते कृष्ण दौड़कर सुदामा को गले से लगा लिए। सुदामा की दीन दशा को देखकर कन्हैया इतना रोये कि उनकी आँखों के अश्रुओं से ही ब्राह्मण सुदामा के पैर धुल गये। रुक्मिणी सोच रही हैं- किमनेन कृतं पुण्यं अवधूतेन भिक्षुणा। अर्थात इस अवधूत भिक्षु ने कौन सा पुण्य किया है जो इस संसार में लक्ष्मी से हीन होने के बाद भी साक्षात लक्ष्मीपति इनके चरणों में बैठे हैं-? परमात्मा कृष्ण ने एक मुठ्ठी चावल ग्रहण कर सुदामाजी को श्री से सम्पन्न कर दिया। आचार्य महेश ने बताया कि मित्रता ऐसे ही निभानीं चाहिये। जो न मित्र दुख होहिं दुखारी; तिनहि बिलोकत पातक भारी। अर्थात मित्र के दुख-सुख में हमेशा जो साथ दे वही सच्चा और अच्छा मित्र होता है। इस अवसर पर आचार्य अभिषेक, पंडित आशीष तिवारी, विनीत पांडेय, प्रियव्रत व सत्यव्रत शुक्ल, आयुष ब्रह्मचारी, राधेमोहन सिंह, अशीत पाठक, आशीष चौधरी, अविनाश सिंह नायडू, संजय पाठक, एकलव्य सिंह सहित सैकडों स्त्री-पुरुष श्रद्धालुगण मौजूद रहे।