महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह कथा से भावविभोर हुए श्रद्धालु, दहेज के खिलाफ दिया जागरूकता का संदेश

धर्म/ आध्‍यात्‍म/ संस्‍कृति

संवाददाता : रामनरायन राय उर्फ बबलू राय
आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत प्राचीन शिव मंदिर पटवध कौतुक के पावन प्रांगण में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा एवं धार्मिक आयोजन के दूसरे दिन महाशिवरात्रि पर्व के शुभ संयोग पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा मंच से मर्मज्ञ कथावाचक प्रियंका पांडे एवं पंडित ललित गिरी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथावाचकों ने अपने प्रवचन में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि यह विवाह केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और सच्चे प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने विस्तार से वर्णन किया कि भगवान शिव की बारात कैसी अद्भुत और अलौकिक थी जिसमें देवता, गण, योगी, भूत-प्रेत और विभिन्न स्वरूपों वाले गण शामिल थे। प्रारंभ में माता पार्वती के परिवार में इस अनोखी बारात को लेकर असहमति और आशंका भी उत्पन्न हुई, किंतु अंततः भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन के बाद विवाह संपन्न हुआ और पूरा वातावरण मंगलमय हो उठा। कथा के दौरान दोनों विद्वानों ने महाशिवरात्रि के महत्व को बताते हुए कहा कि यह पर्व आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि शिव-पार्वती का विवाह समाज को यह शिक्षा देता है कि जीवन में बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि संस्कार, प्रेम और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। प्रवचन के मध्य कथावाचकों ने समाज में बढ़ रही दहेज प्रथा पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने महिलाओं और बच्चियों के साथ हो रहे दहेज उत्पीड़न को सामाजिक कलंक बताते हुए कहा कि दहेज लेना और उसके लिए बेटियों को प्रताड़ित करना महापाप है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से संकल्प लेने का आह्वान किया कि समाज से दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सभी मिलकर जागरूकता फैलाएं और बेटियों को सम्मान दें। कथा के दौरान मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा और बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। पूरे आयोजन में भक्ति, संस्कार और सामाजिक जागरूकता का सुंदर संगम देखने को मिला। महाशिवरात्रि के अवसर पर बच्चों ने गुलाल अबीर तथा फुलों से होली भी खेली गई आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक लोगों से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ लेने की अपील की।