रिपोर्ट- नीरज शुक्ला (रामनगर बाराबंकी)
शनिवार को रामनगर तहसील सभागार में हुए समाधान दिवस में फरियादियों का शैलाब उमड़ पड़ा। फरियादी हाथों में उम्मीद का पत्र लिए कतार में खडे अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। इसके साथ सभागार में बैठे अधिकांश अधिकारी व कर्मचारी भी मोबाइल देखने में व्यस्त मिले।
इसी बीच वहां पर उपस्थित पीड़ित शेष नरायण निवासी मोहल्ला धमेड़ी -4 रामनगर ने बताया कि इस योगी सरकार में लेखपालों की तो पौ बारह हो गयी है। शाशन के कड़े निर्देशों के बावजूद भी इनकी मनमानी चरम सीमा पर है। मेरे खेत का मुकदमा रामनगर कोर्ट में विचाराधीन है। इसी दौरान विपक्षी से लेखपाल व कानून गो ने अच्छी सांठ-गांठ कर मेरे खेत का वरासत कर दिया गया। जिसकी शिकायत लेकर दर दर भटकने पर मजबूर हूं।
इसी क्रम में वहां उपस्थित पीड़िता कनीज बेगम पत्नी अब्दुल लतीफ निवासी मोहल्ला लखरौरा रामनगर ने बताया कि एक तरफ योगी सरकार गरीब,असहाय व निर्धन जैसे लोगों को आवास मुहैय्या कराने के दिन रात प्रयासरत है, लेकिन दूसरी तरफ स्थानीय सक्षम अधिकारियों को सरकार के इन निर्देशों में कोई दिलचस्पी नहीं है। लगभग तीन साल से आवास के लिए प्रार्थना पत्र लेकर सरकारी दफ्तर दौड़ रहे है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिसके कारण मेरा परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को विवश है।
पीड़ितों में ग्राम अतरौली मजरे विलखिया निवासी राम प्रकाश यादव व मान सिंह ने बताया कि लगभग एक साल से गांव में पानी की सप्लाई बंद है। जिसके कारण इस गंभीर समस्या से पूरा गांव जूझ रहा है, लेकिन विडंबना तो यह है कि सम्बंधित अधिकारियों के संज्ञान होने के बावजूद भी इस समस्या का आज तक समाधान नहीं हुआ है।
महादेवा निवासी उमेश तिवारी ने बताया कि मेरी पुश्तैनी भूमि पर ग्राम प्रधान बलपूर्वक कब्जा कर रहे है। रोकने पर भद्दी-भद्दी गालियां देते है। हर बार की तरह आज फिर समाधान दिवस में न्याय की गुहार लगाने आया हूं।
ग्राम पंचायत खेतौरा में प्रधान प्रतिनिधि द्वारा पुश्तैनी जमीन पर नीम का पेड़ व बांस कोठी कटवा कर जबरिया रास्ता निर्माण कराया जा रहा है, जिसको लेकर पीड़ित सीता देवी पत्नी महेंद्र सिंह निवासी ग्राम खेतौरा ने बुधवार को जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी को लिखित शिकायती प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी। एक सप्ताह होने को है लेकिन आज तक न्याय नहीं मिला है। सीता देवी ने उप जिलाधिकारी से उपरोक्त विपक्षी गणों पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा पुश्तैनी कब्जाई गई भूमि को कब्जा मुक्त कराए जाने की मांग की है।
सूत्रों की माने तो संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकारियों द्वारा महज औपचारिकता निभाई जा रही है, जिसके कारण फरियादियों का समाधान दिवस से मोहभंग होता दिखाई पड़ रहा है। आज के समय में पीड़ितों को ग्राहक की नजर से देखा जा रहा है। संपूर्ण समाधान दिवस में सैकड़ो की तादात में फरियादी फरियाद लेकर आते हैं, लेकिन दो-चार शिकायतों पर तत्काल निस्तारण करके अधिकारियों द्वारा अपनी पीठ थपथपा ली जाती हैं।
इसी क्रम में आज संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 77 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से पांच प्रार्थना पत्रों का तत्काल निस्तारण कराया गया।
अब सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में बचे 72 शिकायत पत्रों का निस्तारण संबंधित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा या फिर इन प्रार्थना पत्रों को नजर अंदाज कर कूड़ेदान में डाल दिया जायेगा।




