Azamgarh News:संघर्ष से सफलता तक, पांडेचवर के सुशांत सुजय बने असिस्टेंट कमिश्नर, युवाओं को दिया मेहनत का मंत्र

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आजमगढ़ मंडल ब्यूरो रामनरायन राय उर्फ बबलू राय की खास रिपोर्ट

संघर्ष से सफलता तक, पांडेचवर के सुशांत सुजय बने असिस्टेंट कमिश्नर, युवाओं को दिया मेहनत का मंत्र

आजमगढ़ जनपद के विकासखंड बिलरियागंज अंतर्गत पांडेचवर गांव से निकले एक होनहार बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से वह मुकाम हासिल किया है, जो हर प्रतियोगी छात्र का सपना होता है। सुशांत सुजय ने उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा 2024 मेंने असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स) पद पर चयनित होकर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन कर दिया है।
एक साधारण शिक्षक परिवार से आने वाले सुशांत के पिता जयप्रकाश प्राथमिक विद्यालय तोहफापुर में प्रधानाध्यापक हैं, जबकि माता सुशीला एक गृहणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुशांत ने शुरू से ही पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार मेहनत करते रहे।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा राहुल सांस्कृत्यायन स्कूल, लक्षीरामपुर से हुई और आगे की पढ़ाई चिल्ड्रन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, आजमगढ़ से पूरी की। इसके बाद उन्होंने शिब्ली नेशनल कॉलेज से स्नातक किया। बड़े सपनों को साकार करने के लिए वह दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंचे, जहां उन्होंने कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ तैयारी शुरू की।
तीन बार असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। चौथे प्रयास में उन्होंने अपनी मंजिल हासिल कर ली। उनकी यह सफलता यह साबित करती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी होती है।
सुशांत अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और विशेष रूप से परिवार के मार्गदर्शक अजेंद्र राय को देते हैं, जिन्होंने हर कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया।
उनका पूरा परिवार शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है—बड़ी बहन सुप्रिया लेक्चरर बनने की तैयारी में हैं, छोटी बहन सुष्मिता CAT की तैयारी कर रही हैं, और छोटे भाई रोहित दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स कर रहे हैं।
सुशांत की सफलता से गांव और क्षेत्र में खुशी की लहर है। दर्जनों लोग उनके घर पहुंचकर उन्हें बधाई दे रहे हैं। क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया है।
खास बात यह है कि इस उपलब्धि के बाद भी सुशांत रुके नहीं हैं। वह अब पीसीएस 2025 की मुख्य परीक्षा में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
सुशांत का संदेश साफ है,
“अगर लक्ष्य तय हो, मेहनत सच्ची हो और धैर्य बना रहे, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।”
उनकी कहानी हर उस छात्र के लिए एक प्रेरणा है, जो संघर्षों से घबराता है। यह सफलता बताती है कि गांव की मिट्टी से निकलकर भी देश की बड़ी परीक्षाओं में जीत हासिल की जा सकती है।