ईरान में सुन्नियों के लिए मस्जिद नहीं:शिया-सुन्नी एकता पर सवाल उठाए, भारत की तारीफ की: वसीम राईन

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ईरान-इजरायल युद्ध और ईरान के सुप्रीम लीडर के निधन के बाद भारत में शोक प्रदर्शनों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। ‘ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज’ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने ईरान की धार्मिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में ‘शिया-सुन्नी एकता’ के नारे लग रहे हैं, जबकि तेहरान में इसकी असलियत कुछ और है।वसीम राईन ने दावा किया कि ईरान की राजधानी तेहरान में सुन्नी समुदाय के लिए एक भी मस्जिद नहीं है। उन्होंने उन उलेमाओं पर सवाल उठाया जो भारत में शिया-सुन्नी एकता की बात करते हैं। राईन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेहरान से इस्लामिक नेतृत्व का संदेश दिया जाता है, लेकिन वहां सुन्नी मुसलमानों को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद उपलब्ध नहीं है।उन्होंने शिया उलेमाओं से तेहरान में सुन्नी भाइयों के लिए मस्जिद बनवाने की मांग की। राईन ने कहा कि वहां लोग घरों में नमाज पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने पूछा कि यह कैसी एकता है, जहां एक फिरके के लिए इबादतगाह तक नहीं है।

वसीम राईन ने ईरान की तुलना भारत से करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां गंगा-जमुनी तहजीब की जड़ें गहरी हैं।उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिया और सुन्नी भाई एक साथ आजादी से इबादत करते हैं। यहां हर जगह मस्जिदें हैं और सभी को अपना धर्म मानने की पूरी आजादी है।राईन ने इसे भारतीय लोकतंत्र की महानता बताया और कहा कि जो लोग विदेशों के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने देश की सहिष्णुता और खूबसूरती को समझना चाहिए।