रसड़ा का चंद्रशेखर आज़ाद चौराहा अब ‘घोड़ा चौराहा’ के नाम से पहचाने जाने लगा, शहीद की पहचान पर सवाल।
रसड़ा (बलिया)।
देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के नाम पर स्थापित रसड़ा का प्रसिद्ध चौराहा आज अपनी पहचान खोता हुआ नजर आ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि लोग अब इसे “घोड़ा चौराहा” कहने लगे हैं, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि शहीद के सम्मान पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
चौराहे पर स्थापित चंद्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा के चारों ओर बड़े-बड़े घोड़ों की आकृतियां लगाए जाने के बाद चौराहे का मूल स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घोड़ों की प्रतिमाएं इतनी प्रमुख हैं कि शहीद आज़ाद की मूर्ति पीछे छूट जाती है, जिससे आने-जाने वाले लोगों का ध्यान आज़ादी के नायक की बजाय घोड़ों पर अधिक जाता है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की माने तो यह चौराहा चंद्रशेखर आज़ाद चौराहा के नाम से ही जाना जाता रहा है और इसे उसी पहचान के साथ बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। लोगों का सुझाव है कि
शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की मूर्ति को और अधिक भव्य व ऊँचा किया जाए,
घोड़ों की जगह देशभक्ति, स्वतंत्रता संग्राम या वीर शहीदों से जुड़ी प्रतिमाएं स्थापित की जाएं,
ताकि आने वाली पीढ़ियां इस चौराहे से आज़ादी के इतिहास और बलिदान की प्रेरणा ले सकें।
लोगों का साफ कहना है कि किसी भी हाल में शहीद के नाम और पहचान को धूमिल नहीं होने दिया जाना चाहिए। चौराहे का नाम नहीं, बल्कि उसकी भावना और उद्देश्य सबसे महत्वपूर्ण है। अब देखना यह है कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदार लोग इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।




