सेहत की सौगात लेकर मिर्जाहाजीपुरा पहुंचा आज़मी हॉस्पिटल, 140 मरीजों को मिला मुफ्त इलाज

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संवादता वसीम खान मऊ। इस्लामाबाद मिर्जाहाजीपुरा की गलियों में कुछ अलग नज़ारा देखने को मिला। पहली बार ऐसा हुआ जब डॉक्टर खुद मरीजों के दरवाज़े पर पहुंचे। न अस्पताल की भीड़, न लंबी कतारें, और न फीस का झंझट। मौका था आज़मी हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर की तरफ से लगाए गए नि:शुल्क मेडिकल कैंप का, जहां 140 से ज़्यादा मरीजों का मुफ्त इलाज किया गया।कैंप की कमान संभाली हॉस्पिटल के सीईओ डॉ. पंकज सिंह ने, जो शुरुआत से अंत तक खुद मोर्चे पर डटे रहे। हर मरीज से बात करना, हर व्यवस्था देखना और हर चेहरे पर सुकून लाना उनकी प्राथमिकता में शामिल था। डॉ. सिंह ने साफ कहा – “इलाज सिर्फ दीवारों के अंदर नहीं होता, असली सेवा तब होती है जब हम खुद चलकर लोगों तक पहुंचें।”

शिविर में चिकित्सा सेवाएं देने पहुंचे अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने मरीजों को न सिर्फ दवा दी, बल्कि उम्मीद भी लौटाई। डॉ. नलिनी सिंह ने महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें जरूरी परामर्श दिया। वहीं डॉ. मोबश्शेरा आतिफ, डॉ. अभिनंदन पाल और डॉ. मोहम्मद आतिफ ने बीपी, शुगर, बुखार, सांस व जोड़ों से जुड़ी बीमारियों की जांच कर मौके पर ही इलाज शुरू कर दिया।

शिविर की सबसे बड़ी बात यह रही कि इलाज के साथ-साथ मरीजों को मुफ्त दवाएं भी दी गईं। जरूरतमंदों के चेहरों पर जो सुकून दिखा, वही इस शिविर की असली सफलता थी।

मोहल्ले के बुजुर्ग नूर मोहम्मद ने कहा, “जिन पैसों के चक्कर में शहर के बड़े हॉस्पिटल घुमाते हैं, वही इलाज आज यहां गली के नुक्कड़ पर मिल गया — वो भी इज्ज़त के साथ।”

महिलाएं भी इस शिविर से बेहद संतुष्ट नजर आईं। कई ऐसी बीमारियां, जिन्हें सालों से नजरअंदाज किया जा रहा था, अब उनका इलाज शुरू हुआ। डॉ. नलिनी सिंह का मानना है कि ऐसे शिविर महिलाओं को खुलकर बोलने का मंच देते हैं।आजमी हॉस्पिटल की टीम ने यह साफ किया कि यह एक बार की पहल नहीं है। यह एक मिशन है, जो तब तक चलेगा जब तक इलाज सिर्फ सुविधा वालों की चीज़ नहीं रह जाती। आने वाले हफ्तों में अन्य मोहल्लों और गांवों में भी इसी तरह के शिविर लगाए जाएंगे।

कुल मिलाकर मिर्जाहाजीपुरा में सिर्फ तारीख नहीं रहा, बल्कि एक बदलाव की शुरुआत बन गया — जहां इलाज लाइन में नहीं, लोगों के पास चलकर गया।